दीप ज्योति और नगाड़े की धमक के साथ प्रस्फुटित हुआ कला पर्व ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’
हवाला गांव के ग्रामीण कला परिसर ‘‘शिल्पग्राम’’ में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित शिल्पग्राम उत्सव का सुरीला और मनमोहना आगाज़ शुक्रवार को हुआ। नगाड़ा वादन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ दस दिनों का कला कुंभ कला रसिकों के बीच प्रस्फुटित हुआ।

हवाला गांव के ग्रामीण कला परिसर ‘‘शिल्पग्राम’’ में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित शिल्पग्राम उत्सव का सुरीला और मनमोहना आगाज़ शुक्रवार को हुआ। नगाड़ा वादन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ दस दिनों का कला कुंभ कला रसिकों के बीच प्रस्फुटित हुआ।
शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच ‘‘कलांगन’’ पर सांझ ढलने के साथ कला और शिल्प का प्रतीक दीप प्रज्ज्वलित हुआ। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवीन्द्र माहेश्वरी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. शर्मा तथा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमा शंकर शर्मा, केन्द्र निदेशक फुरकान खान ने गणेश जी प्रतिमा के समक्षदीप प्रज्ज्वलित किया तथा बाद में डंडे से नगाड़े की धमक से उत्सव का आगाज़ किया।
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इस अवसर पर निदेशक फुरकान खान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए व उत्सव का परिचय देते हुए बताया कि उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के 700 लोक कलाकार और 27 राज्य के शिल्पकार शिरकत करेंगे। परिसर में लिपाई-पुताई और अलंकरणों से शिल्पग्राम की पारंपरिक आभा पर्यटकों का मन अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. जे.पी. शर्मा ने कहा कि यू तो आप पूरा भारत भ्रमण नहीं कर सकते किन्तु यहां मिनी भारत नजर आयेगा। उदयपुर के लोग लोक एवं संस्कृति के लिये जिन्दा रहते हैं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री माहेश्वरी ने कहा कि लोगों का कला एवं संस्कृति के प्रति जो लगाव है वो इस उत्सव में देखने को मिलेगा। उन्होंने केन्द्र निदेशक को बधाई दी। प्रो. जे.पी. शर्मा ने उत्सव की गतिविधयों को सराहा।
केन्द्र निदेशक फुरकान ख़ान ने इस अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री कल्याण सिंह से प्राप्त संदेश का वाचन किया जिसमें उन्होंने उत्सव के लिये शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि लोक उत्सवों से देश की सांस्कृतिक एकता और सद्भावना को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। आयोजनों में आप सभी लोगों की सक्रिय सहभागिता एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को विश्व में फैलाने में मददगार होगी।
संदेश में राज्यपाल ने लोक संस्कृति का यह अनूठा शिल्पग्राम उत्सव निरंतर निर्धारित समय पर हो रहा है। इस समारोह ने देश के सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
