हरियाणा में 16 साल बाद ऑडिट सिस्टम लागू ! गड़बड़ी मिलने पर अफसरों की जेब से होगी वसूली
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा में निकायों के एक-एक पैसे का हिसाब रखने के लिए कानून लागू करने में राज्य सरकार ने 16 साल का वक्त लगा दिया। 13वें वित्त आयोग ने अपनी (2010-2015) की रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की थी कि राज्य सरकार को सभी स्थानीय निकायों (शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों) के लिए मजबूत ऑडिट प्रणाली लागू करनी चाहिए।
सरकार ने अब इसके लिए ऑडिट प्रणाली बनाई है। इसकी अधिसूचना जारी हो गई है। वहीं अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। इसमें एक हजार से पांच हजार रुपए जुर्माना व सरकारी खजाने को होने वाली वित्तीय हानि जिम्मेदार की जेब से वसूलने का प्रावधान किया गया है। वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद तीन माह में रिपोर्ट नहीं मिलती है तो निदेशक संबंधित निकाय का बजट रोकने के लिए सरकार से सिफारिश भी कर सकेंगे। Haryana News
अब इस ऑडिट सिस्टम से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिए जाने वाले पैसों पर भी नजर रखी जा सकेगी कि उसका सदुपयोग हुआ है या नहीं।
किन पर लागू होगा नया ऑडिट कानून?
कानून के दायरे में सभी स्थानीय निकाय एवं संस्थान शामिल होंगे। इनमें नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिकाएं, जिला परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतें शामिल हैं। सभी राज्य विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी और महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज भी इसके दायरे में आएंगे। स्थानीय फंड से जुड़े सभी चैरिटेबल एंडोमेंट फंड और राहत फंड के साथ राज्य सरकार व सहायता प्राप्त इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों का भी ऑडिट होगा। सरकार की मंजूरी से निदेशक, लोकल ऑडिट विभाग अन्य प्राधिकरणों, संस्थाओं या फंड को भी सूची में शामिल कर सकेंगे। Haryana News
लापरवाही पर जुर्माने के ये प्रावधान
दस्तावेज न दिखाने पर जुर्माना: यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी ऑडिट के दौरान जरूरी वाउचर, स्टेटमेंट या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने से इनकार करता है या लापरवाही बरतता है, तो उस पर न्यूनतम 1,000 रुपए से लेकर अधिकतम 5,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। हालांकि, जुर्माना लगाने से पहले 15 दिन का नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
अवैध भुगतान पर सरचार्ज: निदेशक किसी भी ऐसे भुगतान को खारिज कर सकते हैं, जो नियम के विरुद्ध किया गया हो। वे इसे अधिकृत करने वाले अधिकारी या संस्था पर सरचार्ज लगा सकते हैं। Haryana News
राजस्व बकाया की तरह वसूली: निदेशक द्वारा प्रमाणित राशि का भुगतान एक महीने के भीतर करना होगा। यदि राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो उसे भूमि राजस्व के बकाये के रूप में वसूला जाएगा।
फंड रोकने की सिफारिश: यदि कोई स्थानीय निकाय वित्तीय वर्ष समाप्त होने के तीन महीने के भीतर ऑडिट के लिए अपने खाते प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो निदेशक, सरकार से उस निकाय को मिलने वाले फंड के जारी करने पर रोक लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। Haryana News
अपराधी मामलों में कार्यवाही: यदि जांच के दौरान गबन, धोखाधड़ी या आपराधिक लापरवाही के संकेत मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही होगी।
नए ऑडिट कानून की क्यों पड़ी जरूरत?
13वें वित्त आयोग की सिफारिश: 13वें वित्त आयोग (2010-2015) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की थी कि राज्य सरकार को सभी स्थानीय निकायों के लिए एक मजबूत ऑडिट प्रणाली लागू करनी चाहिए। इसके तहत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा हर स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण दिया जाना तय हुआ था। Haryana News
सरकारी अनुदानों का प्रभावी खर्च सुनिश्चित करना: केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा स्थानीय व अन्य प्राधिकरणों को मिलने वाले अनुदानों का सही और प्रभावी उपयोग हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया था।