आस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक संस्था आयड़ नदी सुधार से जुड़ेगी
प्राकृतिक व जैविक तरीकों से ही आयड़ नदी सहित राजस्थान के समस्त तालाबों व नदियों का प्रभावी उपचार होकर प्रदूषण समस्या का निराकरण हो सकता है। यह विचार प्रदूषण - संदूषण निवारण पर विश्व की वैज्ञानिक संस्था सी.आर.सी. केयर आस्ट्रेलिया के प्रमुख प्रो. रवि नायडू ने विद्या भवन पॉलिटेक्निक में व्यक्त किये।

प्राकृतिक व जैविक तरीकों से ही आयड़ नदी सहित राजस्थान के समस्त तालाबों व नदियों का प्रभावी उपचार होकर प्रदूषण समस्या का निराकरण हो सकता है। यह विचार प्रदूषण – संदूषण निवारण पर विश्व की वैज्ञानिक संस्था सी.आर.सी. केयर आस्ट्रेलिया के प्रमुख प्रो. रवि नायडू ने विद्या भवन पॉलिटेक्निक में व्यक्त किये।
डदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री, झील संरक्षण समिति मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट, ए.ए.एम.सी. ट्रेनिंग सेन्टर ऑस्ट्रेलिया – इण्डिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चर्चा में डा. नायडू ने कहा कि सतही जल, भूजल के प्रदूषण से सम्पूर्ण जीव जगत बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। नदियों की हालत बुरी है। ऐसे में सहभागिता व सहकारिता आधारित बायो रेमेडिएशन तकनीकीयां ही प्रभावी समाधान है।
फिजी मूल के भारतीय, आस्ट्रेलिया के डा. रवि नायडू ग्लोबल इन्स्टीट्यूट फोर एनवायरमेन्ट रेमडिएशन न्यू केसल यूनिवर्सिटी के संस्थापक निदेशक, कोपरेटिव रिसर्च सेन्टर फोर कोन्टामिनेशन आस्ट्रेलिया के निदेशक, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ आस्ट्रेलिया के सेन्टर फोर एनवायरमेन्ट रिस्क असेसमेन्ट एण्ड रेमेडिएशन के संस्थापक निदेशक हैं।
डा. नायडू ने कहा कि सी.आर.सी.केयर तथा ए.ए.एम.सी. ट्रेनिंग सेन्टर ऑस्ट्रेलिया आयड़ नदी सुधार के विविध आयामों में सहभागिता को तैयार है। इसमें शोध, संवाद व फील्ड इम्पलीमेन्टेशन स्तर के कार्य सम्मिलित हैं। नायडू ने कहा कि वे पर्यावरणीय विज्ञान में अन्तरराष्ट्रीय शोध कंे लिए वांछित योग्यता वाले उदयपुर के युवाओं के लिए वित्त व्यवस्था से लेकर हर प्रकार का सहयोग भी करना चाहते हैं।
विश्व के कई देशों में बायो रेमेडिएशन पर कार्य कर रहे डा. नायडू ने आयड़ नदी उपचार की ग्रीन ब्रिज तकनीकी को प्रभावी तकनीक बताया। नायडू ने कहा कि भारत व ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों ने पर्यावरण सुधार में साथ कार्य करने के लिए समझौता किया है। ऐसे में यदि राज्य सरकार, भारत सरकार के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया सरकार को प्रस्ताव भेजे तो नदी सुधार के लिए वित्तीय व्यवस्था भी उपलब्ध हो सकती है। नायडू ने कहा कि वे इसमें पूर्ण सहायता करेगें।
मुख्य वन संरक्षक वेंकटेश शर्मा ने कहा कि आयड़ नदी सुधार सहित समस्त नदियों के सुधार को लेकर शासन व प्रशासन में संवेदनशीलता बड़ी है। पानी, जंगल, पहाड़ सभी कॉमन प्रोपर्टी रिसोर्स (साझा संसाधन सम्पत्ति ) है। सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही इन्हें बचाया जा सकता है। शर्मा ने कहा कि आयड़ नदी व उदयपुर की झीलों के जलग्रहण क्षैत्र के प्रभावी सुधार व उपचार के लिए वन विभाग पूरी तरह से तत्पर है।
राजस्थान लोक सेवा आायोग के पूर्व अध्यक्ष जी. एस. टांक ने कविता से लेकर कानपुर नदी पर हुए अतिक्रमणों को तुरन्त हटानेे का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि प्रदूषण तत्वों का नदी में न्यूनतम ठहराव हो।
ए.ए.एम.सी. ट्रेनिंग सेन्टर ऑस्ट्रेलिया – इण्डिया की निदेशक बी. राजलक्ष्मी ने कहा कि घर के स्तर पर जागरूकता से नदी में प्रदूषक तत्वों को पहुँचने से रोका जा सकता है। राजलक्ष्मी ने कहा कि उदयपुर मंें नदी सुधार के सम्मिलित प्रयासों में वे सहभागिता निभाना चाहती हैं। यू.सी.सी.आई. की आयड़ सुधार समिति के अध्यक्ष कोमल कोठारी, पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डा. अनिल मेहता ने ग्रीन ब्रिज सुधार तकनीकी को प्रदर्शित किया तथा प्रसाशन व राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे जनसहभागिता को साथ लेकर नदियों -तालाबों को सुधारें।
विद्या भवन के अध्यक्ष अजय एस. मेहता ने सामुदायिक सहभागिता को पर्यावरण सुधार की कुंजी बताया। वैज्ञानिक डा. एस.बी. लाल तथा उद्योगपति के.पी. सिंह ने जल गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया।
ट्रस्ट अध्यक्ष विजयसिंह मेहता एवं सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने कहा कि आयड़ गंगा नदी का भाग है। इसके सुधार से ही गंगा में सुधार आयेगा। उदयपुर का स्वैच्छिक जगत इसमें पूर्ण सहभागी है।
यू.सी.सी.आई. के अध्यक्ष वी.पी. राठी ने कहा कि उनका चेम्बर उद्योगों से अपशिष्ठ विसर्जन से पूर्व वांछित उपचार सुनिश्चित होने पर निगरानी रख रहा है। उद्योग जगत नदी सुधार में हर तरह से सहयोग करेगा। नगर निगम के एस.ई. अरूण व्यास तथा प्रन्यास के अधिशासी अभियन्ता मुकेश जानी, संजीव शर्मा, ने निगम व न्यास द्वारा नदी सुधार के प्रयासों की जानकारी दीं
कार्यक्रम में केन्द्रीय भूजल बोर्ड के पूर्व निदेशक ओ.पी. माथुर, पूर्व मत्स्यकी उपनिदेशक इस्माइल अली दुर्गा, वास्तुविद् श्री बी.एल. मंत्री, झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल, हाजी सरदार मोहम्मद, रमेश चन्द्र राजपूत ने भी सहभागिता की।
