हरियाणा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू ! अब नहीं काटने पड़ेंगे तहसीलों के चक्कर

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तहसीलों

Udaipur Times, Haryana News, करनाल : उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल इंतकाल की प्रक्रिया में बदलाव करना नहीं बल्कि लोगों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन पटवारी के लॉग इन में रहेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद 5वें दिन यदि पटवारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो म्यूटेशन स्वत: कानूनगो के लॉगइन में फॉरवर्ड हो जाएगी। कानूनगो को आवश्यक कार्रवाई के लिए 2 दिन का समय दिया जाएगा और 7वें दिन म्यूटेशन स्वत: सीआरओ के लॉगइन में फॉरवर्ड हो जाएगी। सीआरओ द्वारा आवश्यक कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय निर्धारित किया गया है। अंत में 11वें दिन तक यदि निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो म्यूटेशन स्वत: जमाबंदी में इनकॉरपोरेट हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि म्यूटेशन किसी एक स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित न रहे तथा प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी और समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित हो।

सरकार द्वारा नागरिकों के लिए विशेष शिकायत निवारण व्यवस्था

 उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा एक विशेष ऑनलाइन पेज /पोर्टल भी लांच किया जाएगा, जहां कोई भी नागरिक अपनी उस म्यूटेशन से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकेगा जो निर्धारित समय-सीमा में प्रोसेस नहीं हुई है। पोर्टल पर नागरिक अपनी म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन सबमिट कर सकेंगे। संबंधित विभाग/अधिकारी द्वारा 10 दिनों के भीतर मामले पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि म्यूटेशन नियमों के अनुसार हो सकती है, तो नागरिक को म्यूटेशन की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। यदि म्यूटेशन किसी कारणवश नहीं हो सकती, तो संबंधित सीआरओ द्वारा ऑर्डर पारित किया जाएगा। ऑर्डर में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि म्यूटेशन क्यों नहीं की जा सकती, किस नियम/कारण के आधार पर मामला स्वीकार नहीं किया गया तथा आवश्यक होने पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी नागरिक को केवल यह कहकर वापस न भेजा जाए कि इंतकाल नहीं हो सकता, बल्कि उसे लिखित एवं तर्कसंगत निर्णय प्राप्त हो।

राजस्व सेवाओं को डिजिटल बनाने पर जोर

उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक राजस्व सेवाएं नागरिकों को घर बैठे अथवा नजदीकी सीएससी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं। इसके तहत जमाबंदी, म्यूटेशन, डिजीटली साइंड रजिस्ट्री तथा अन्य राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने, छोटी करेक्शन को सरल बनाने तथा तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

समयबद्ध कार्रवाई का आग्रह

उपायुक्त ने बताया कि इस बारे सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि नागरिकों को अपने काम के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने बताया कि डिजिटलाइजेशन का उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी को परेशान करना नहीं है। इसका उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना, जिम्मेदारी तय करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आम नागरिक को समय पर सेवा उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को वास्तविक तकनीकी की समस्या, संचालन संबंधी कठिनाई  या कोई सकारात्मक सुझाव है, तो उसे उचित माध्यम से विभाग के संज्ञान में लाया जा सकता है, ताकि उसका शीघ्र समाधान किया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है- राजस्व सेवाओं में कम से कम मानवीय हस्तक्षेप, अधिक पारदर्शिता, निर्धारित समय में सेवा और आम नागरिक को बिना अनावश्यक चक्कर लगाए उसका अधिकार। तकनीक का उद्देश्य व्यवस्था को कठिन बनाना नहीं, बल्कि नागरिक के लिए व्यवस्था को सरल बनाना है।

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