बलरामपुर चीनी स्थापित करेगी गन्ने पर आधारित बायो-पॉलिमर संयंत्र, 80,000 टन होगी उत्पादन क्षमता

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बलरामपुर चीनी स्थापित करेगी गन्ने पर आधारित बायो-पॉलिमर संयंत्र, 80,000 टन होगी उत्पादन क्षमता

Udaipur Times, Balrampur Chini to set up India’s first large-scale sugarcane-based biopolymer plant: बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में भारत की पहली बड़े पैमाने की बायो-पॉलिमर निर्माण इकाई स्थापित कर रही है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 80,000 टन पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) होगी।

परियोजना में लगभग 2,850 से 3,080 करोड़ रुपये का निवेश
इस ग्रीनफील्ड परियोजना में लगभग 2,850 से 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी आधारशिला रखी थी और अक्टूबर 2026 तक इस इकाई के चालू होने की उम्मीद है। कंपनी अपने उत्पादों को 'बलरामपुर बायोयुग' (Balrampur Bioyug) ब्रांड नाम से बाजार में उतारेगी।

यह संयंत्र गन्ने से प्राप्त फीडस्टॉक और औद्योगिक उप-उत्पादों (by-products) का उपयोग करके बायोडिग्रेडेबल PLA रेजिन बनाएगा। इसका इस्तेमाल डिस्पोजेबल कप, प्लेट, कटलरी, बोतलें, कैरी बैग और पैकेजिंग सामग्री जैसे उत्पादों को बनाने में किया जा सकता है। यह इकाई 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' सिस्टम के साथ काम करेगी और इसमें नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का उपयोग किया जाएगा।

 पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता कम होने की उम्मीद
इस परियोजना से पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है, साथ ही चीनी उद्योग के उप-उत्पादों और कृषि अवशेषों के उपयोग के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे गन्ना किसानों को लाभ मिलने और क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है।

इस परियोजना के तहत, बेल्जियम से आयातित 200 टन वजनी और 41 मीटर लंबा एक वेसल (बड़ा पात्र) एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए मल्टी-एक्सल ट्रक के जरिए साइट तक पहुंचाया जा रहा है। बताया गया है कि यह वाहन शुरुआत में 308 पहियों के साथ चला था, लेकिन रास्ते की जरूरतों के हिसाब से इसे बदलकर लगभग 250 पहियों तक सीमित कर दिया गया।

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