घर किराए पर लेने से पहले जरूर चेक कर लें ये चीजें, वरना बाद में लगाने पड़ सकते हैं कोर्ट के चक्कर

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घर किराए पर लेने से पहले जरूर चेक कर लें ये चीजें, वरना बाद में लगाने पड़ सकते हैं कोर्ट के चक्कर

Udaipur Times, House Rent 8 things legal safety : नया घर किराए पर लेना उतना आसान नहीं है जितना दिखता है। अक्सर, लोग घर, उसकी लोकेशन और किराए को देखकर ही तुरंत चाबियां ले लेते हैं। हालांकि, बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए रहने जाने से छोटी-छोटी समस्याएं बड़े झगड़ों में बदल सकती हैं।

मकान-मालिक और किराएदार अक्सर कई मुद्दों पर झगड़ते हैं जैसे सिक्योरिटी डिपॉज़िट की वापसी, किराया बढ़ाने की पॉलिसी, यूटिलिटी बिल (बिजली और पानी) और आखिर में घर खाली करना। हालाँकि केंद्र सरकार का 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' एक गाइडलाइन का काम करता है, लेकिन असल नियम आपके राज्य के कानूनों और रेंट एग्रीमेंट की खास शर्तों पर निर्भर करते हैं। इसलिए, घर का कब्ज़ा लेने से पहले इन आठ बातों को साफ़ कर लें:

1. रेंट एग्रीमेंट को हल्के में न लें

किराए, लीज़ की अवधि, सिक्योरिटी डिपॉज़िट, मरम्मत और नोटिस पीरियड से जुड़ी जानकारी आपके और मकान-मालिक के बीच हमेशा लिखित में होनी चाहिए। मॉडल टेनेंसी एक्ट में भी लिखित एग्रीमेंट ज़रूरी है। साइन करने से पहले हर क्लॉज़ को ध्यान से पढ़ें और अपने रिकॉर्ड के लिए ओरिजिनल कॉपी सुरक्षित रखें।

2. सिक्योरिटी डिपॉज़िट की शर्तों को पहले ही समझ लें

घर किराए पर लेते समय, मकान-मालिक से डिपॉज़िट की रकम और घर खाली करने पर वह कब वापस की जाएगी, इसके बारे में साफ़-साफ़ पूछें। मॉडल टेनेंसी एक्ट रिहायशी प्रॉपर्टी के लिए सिक्योरिटी डिपॉज़िट को ज़्यादा से ज़्यादा दो महीने के किराए तक सीमित रखने का सुझाव देता है। घर खाली करते समय किसी भी कटौती जैसे नुकसान या बकाया राशि का आधार भी पहले ही तय कर लेना चाहिए।

3. किराया भुगतान का पक्का सबूत रखें

किराए का भुगतान हमेशा बैंक ट्रांसफर, नेट बैंकिंग या UPI से करें ताकि आपके पास ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड रहे। अगर कैश में भुगतान कर रहे हैं, तो मकान-मालिक से रसीद ज़रूर लें। ऑनलाइन पेमेंट का बैंक एक्नॉलेजमेंट आपको भविष्य की किसी भी गलतफहमी या झगड़े से बचाएगा।

 4. किराया बढ़ाने की शर्तों पर पहले ही सहमति बना लें

यह गलतफहमी है कि पूरे देश में किराया बढ़ाने के लिए तीन महीने का नोटिस ज़रूरी है। किराया कब और कितना बढ़ेगा, यह पूरी तरह से आपके रेंट एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए, एग्रीमेंट बनाते समय सालाना किराया बढ़ोतरी की प्रतिशत दर ज़रूर तय कर लें। 

5. मकान मालिक के घर में आने से जुड़े नियम जानें

हां, किराएदार होने के बावजूद आपकी प्राइवेसी मायने रखती है। असल में, मकान मालिक या प्रॉपर्टी मैनेजर को बिना बताए घर में घुसने का अधिकार नहीं है। आम तौर पर, उन्हें घर आने से कम से कम 24 घंटे पहले नोटिस देना होता है चाहे लिखित रूप में हो या डिजिटल मैसेज के ज़रिए।

6. बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं की पहले ही जांच कर लें

कोई भी एडवांस पेमेंट करने से पहले, बिजली और पानी के कनेक्शन, वेंटिलेशन, नल, मोबाइल नेटवर्क कवरेज और पार्किंग की जगह को खुद जाकर देखें। जिस दिन आप घर में रहने जाएँ, उस दिन बिजली और पानी के मीटर की मौजूदा रीडिंग नोट कर लें और उनकी तस्वीरें ले लें; इससे यह पक्का हो जाएगा कि आप पर पिछले मकान मालिक या किराएदार का कोई बकाया बिल न आए।

7. घर खाली करने के नियमों को समझें

अक्सर लोग सोचते हैं कि मकान मालिक उन्हें अपनी मर्ज़ी से घर से नहीं निकाल सकता या हमेशा एक खास नोटिस पीरियड ज़रूरी होता है। असल में, घर से निकालने के नियम राज्य के कानूनों और आपके रेंट एग्रीमेंट की शर्तों के आधार पर तय होते हैं। इसलिए, नोटिस पीरियड वाली शर्त को पहले ही ध्यान से देख लें।

8. घर और आस-पास के इलाके की जांच करें

घर फाइनल करने से पहले, आस-पड़ोस का माहौल, कनेक्टिविटी और बाज़ार, स्कूल, अस्पताल और आपके काम की जगह से दूरी की जांच करें। साथ ही, घर में रहने जाने पर, अगर कोई नुकसान, सीलन या दाग-धब्बे हों, तो उनकी तस्वीरें लें और मकान मालिक को WhatsApp या ईमेल से भेज दें; इससे बाद में घर खाली करते समय आपको उन नुकसानों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

अंत में, सबसे जरूरी बात

घर किराए पर लेते समय जल्दबाज़ी न करें। घर किराए पर लेते समय सिर्फ़ किराए और लोकेशन पर ही ध्यान न दें। एग्रीमेंट, सिक्योरिटी डिपॉज़िट, पेमेंट का सबूत, नोटिस पीरियड और प्रॉपर्टी की मौजूदा हालत के बारे में जानकारी पहले ही साफ़ कर लें। ऐसा करने से बाद में होने वाले गैर-जरूरी झगड़ों की संभावना काफी कम हो सकती है।

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