भारत ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) पर पूंजीगत लाभ (Capital Gains Tax) समाप्त किया
उदयपुर, जून 5, 2026: पश्चिम एशिया में चल रही युद्ध की उथल पुथल से भारतिय रुपये पर बढ़ते दबाव और शेयर मार्केट से एक्विटी आउट्फ्लो काम करने के मकसद से भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।
अप्रैल 1, 2026 से सरकारी सेक्यूरिटीस (Government Securities) में बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) और विदेशी संस्थागत निवेशकों को मिलने वाले ब्याज एवं ऐसी प्रतिभूतियों (Govt Securities) की बिक्री से होने वाले लाभ पर इन निवेशकों को कोई कैपिटल टैक्स गैन्स टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
हालांकि इस फैसले के बाद बॉन्ड मार्केट या रुपये की कीमत में तुरंत कुछ खास उछाल नहीं आया। लेकीन इस फैसले का मकसद पीछले कुछ महीने से चल रहे USA-Israel-Iran युद्ध के वजह से बढ़ती तेल की कीमत से हुए रुपए में 5% से अधिक की गिरावट को रोकना और ज्यादा स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है।
जानकारों का कहना है कि इस छूट से विदेशी निवेशकों की टैक्स के बाद की कमाई बढ़ सकती है और वे भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज में ज़्यादा निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। इससे निवेशकों का दायरा बढ़ाने और बाहरी दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
चूंकि संसद का सत्र नहीं चल रहा है, इसीलिए इस फैसले को एक इग्ज़ेक्यटिव ऑर्डर के तहत लिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 के तहत Income Tax Act 2025 के अनुसूची (Schedule) IV में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के तहत सरकारी सिक्योरिटीज़ से मिलने वाले ब्याज और उनकी बिक्री, एक्सचेंज या ट्रांसफर से होने वाले कैपिटल गेन्स पर कुछ खास संस्थाओं को टैक्स से छूट मिलेगी। इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी, जैसे टैक्स अधिकारियों को तय जानकारी देना।
इस संशोधन के पहले, विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज़्यादा रखे गए लिस्टेड Shares और Bonds पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (Long Term Capital Gains Tax) देना पड़ता था, और सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स लगता था।
