टोल सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव ! अब नहीं चलेगी मनमानी, सरकार लाई ये नया फॉर्मूला

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टोल सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव ! अब नहीं चलेगी मनमानी, सरकार लाई ये नया फॉर्मूला 

Udaipur Times, New Toll Tax Rules : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स की गणना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब पुल, सुरंग, फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड वाले हाईवे पर टोल की गणना नए फॉर्मूले से होगी। इससे कई हाईवे पर वाहन चालकों को पहले की तुलना में कम टोल देना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य टोल व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और यात्रियों के लिए किफायती बनाना है।

पहले कैसे लगता था टोल?

अब तक जिन हाईवे पर पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड जैसी महंगी संरचनाएं होती थीं, वहां टोल की गणना के लिए इन संरचनाओं की वास्तविक लंबाई को 10 गुना माना जाता था। यानी यदि किसी हाईवे पर 10 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन है तो टोल की गणना 100 किलोमीटर के बराबर की जाती थी। इससे ऐसे मार्गों पर टोल शुल्क काफी अधिक हो जाता था।

अब क्या बदला?

संशोधित नियमों के अनुसार टोल की गणना दो तरीकों से की जाएगी और जिसका परिणाम कम होगा, उसी के आधार पर टोल तय किया जाएगा। संरचनाओं (ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड) की लंबाई का 10 गुना। पूरे हाईवे सेक्शन (सामान्य सड़क + संरचनाएं) की कुल लंबाई का 5 गुना। इन दोनों में जो दूरी कम होगी, उसी को टोल योग्य दूरी माना जाएगा। वहीं 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाली संरचनाओं को अलग से नहीं गिना जाएगा।

अब टोल की गणना 130 किलोमीटर की बजाय 100 किलोमीटर के आधार पर होगी। इससे इस उदाहरण में टोल योग्य दूरी करीब 23 प्रतिशत कम हो जाएगी। कई परियोजनाओं में यह राहत 40 प्रतिशत तक भी हो सकती है। 

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन वाहन चालकों को मिलेगा जो लंबे पुलों, सुरंगों, फ्लाईओवर या एलिवेटेड कॉरिडोर वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करते हैं। इससे लंबी दूरी की यात्रा सस्ती होगी, व्यावसायिक वाहनों की परिवहन लागत कम होगी और टोल निर्धारण की प्रक्रिया अधिक समान एवं पारदर्शी बनेगी।

हर हाईवे पर नहीं घटेगा टोल

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नहीं होगा। यह केवल उन हाईवे सेक्शनों पर लागू होगा जहां पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड जैसी संरचनाएं मौजूद हैं और जो संशोधित नियमों के दायरे में आते हैं। संबंधित परियोजनाओं के लिए नए टोल नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही संशोधित दरें लागू होंगी।

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