हरियाणा में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने 1221 करोड़ रुपये का किया भुगतान
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा में खरीफ खरीद सीजन के दौरान धान की सरकारी खरीद तेजी से जारी है। राज्य की खरीद एजेंसियों ने अब तक 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है और किसानों को 1,221 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गौरतलब है कि सामान्य श्रेणी के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज धान खरीद की समीक्षा करते हुए मंडियों में धान की आवक, खरीद, उठान, किसानों को भुगतान तथा खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रगति का जायजा लिया।
समीक्षा बैठक में फसल खरीद के पूरे सीजन के दौरान सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन, खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों, ढुलाईकर्ताओं और चावल मिल मालिकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। साथ ही समुचित उठान व्यवस्था बनाए रखने, पारदर्शी तुलाई एवं नमी की जांच तथा खरीद से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की गई।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी. कुमार ने बताया कि अब तक प्रदेश की मंडियों में 21.27 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई है, जिसमें से 15.52 लाख मीट्रिक टन की खरीद की जा चुकी है और 7.69 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है। केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए निर्धारित 58 लाख मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के मुकाबले राज्य अब तक लगभग 27 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुका है।
बैठक में किसानों को समय पर भुगतान, गेट पास जारी करने की सुचारू व्यवस्था और डिजिटल माध्यम से प्रभावी सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने उपायुक्तों से बातचीत करते हुए उन्हें खरीद प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर खरीद एवं उठान की गति और तेज करने के निर्देश दिए।
जिलावार समीक्षा में कई जिलों में खरीद प्रक्रिया उत्साहजनक रही। आवक के मुकाबले नीलामी के अनुपात में कुरुक्षेत्र 88.2 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि यमुनानगर में यह अनुपात 81.8 प्रतिशत और अंबाला में 80.7 प्रतिशत रहा। राज्य का औसत 74.7 प्रतिशत दर्ज किया गया।
नीलामी के मुकाबले खरीद के अनुपात में पंचकूला 93.7 प्रतिशत के साथ आगे रहा। कुरुक्षेत्र में यह अनुपात 92.4 प्रतिशत और कैथल में 90.9 प्रतिशत रहा। अंबाला में 89.3 प्रतिशत, यमुनानगर में 85.4 प्रतिशत और करनाल में 78.5 प्रतिशत अनुपात दर्ज किया गया, जबकि राज्य का औसत 86 प्रतिशत रहा।
नीलामी के मुकाबले उठान के अनुपात में पंचकूला 57.1 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा। कुरुक्षेत्र में यह अनुपात 55 प्रतिशत और कैथल में 52.2 प्रतिशत रहा, जबकि अंबाला में 49.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस श्रेणी में राज्य का औसत 48.2 प्रतिशत रहा।
राज्य सरकार धान खरीद और चावल मिलों के संचालन में डिजिटल तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। बैठक में बताया गया कि नए ऑनलाइन राइस मिल पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से 1,433 चावल मिलों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 1,215 मिलों का जियो-फेंसिंग आधारित भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया गया है। चावल मिलों की बिजली खपत और बिजली बिलों की भी निगरानी की जा रही है, जिससे मिलिंग प्रक्रिया की निगरानी व्यवस्था और मजबूत हो रही है।
प्रदेश में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से भी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है। अब तक 1,52,136 किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा चुका है। प्रदेश में धान की सरकारी खरीद 29 सितंबर से 249 निर्धारित मंडियों में शुरू हुई थी और यह 15 नवंबर तक राज्य की जारी रहेगी।
बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री के. मकरंद पांडुरंग, हैफेड के प्रबंध निदेशक श्री चंद्रशेखर खरे, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक श्री अंशज सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।