हरियाणा में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरसों के MSP में 413 रुपये बढ़ोतरी, जाने रबी फसलों के नए भाव ?

 | 
हरियाणा में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरसों के MSP में 413 रुपये बढ़ोतरी, जाने रबी फसलों के नए भाव ?

Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : केंद्र सरकार द्वारा रबी 2027-28 की प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी से हरियाणा के किसानों को काफी लाभ होगा। वर्तमान सरकारी खरीद को आधार मानें तो एमएसपी में हुई बढ़ोतरी से राज्य के किसानों को लगभग 515 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होने का अनुमान है। वहीं, यदि सरसों की सरकारी खरीद राज्य द्वारा निर्धारित लगभग 13 लाख टन के स्तर तक पहुंचती है, तो किसानों को मिलने वाला अतिरिक्त लाभ बढ़कर लगभग 720 करोड़ रुपये हो सकता है।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एमएसपी की बढ़ोतरी का सबसे अधिक लाभ सरसों और गेहूं उत्पादक किसानों को मिलने की संभावना है। सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 413 रुपये प्रति क्विंटल की उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरसों का मूल्य 6,200 रुपये से बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसी प्रकार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये से बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जिससे किसानों को 25 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

सरसों किसानों को सबसे बड़ा लाभ

एमएसपी में बढ़ोतरी होने से हरियाणा में लगभग 8 लाख टन सरसों की सरकारी खरीद होने पर किसानों को करीब 330 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है। यदि सरसों की खरीद बढ़कर 13 लाख टन तक पहुंचती है, तो अकेले सरसों उत्पादकों को लगभग 537 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। इस स्थिति में रबी फसलों से किसानों को मिलने वाला कुल अतिरिक्त लाभ लगभग 720 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

सरसों के उत्पादन में अग्रणी सिरसा, भिवानी, महेंद्रगढ़ और चरखी दादरी जैसे जिलों के किसानों को इस बढ़ोतरी का विशेष लाभ मिलने की संभावना है। सरसों की खरीद की मात्रा गेहूं की तुलना में काफी कम होने के बावजूद प्रति क्विंटल अधिक मूल्य वृद्धि के कारण सरसों से होने वाला अतिरिक्त लाभ गेहूं की तुलना में लगभग दोगुना है।

गेहूं उत्पादकों को भी मिलेगा सीधा लाभ

हरियाणा में लगभग 72 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद को आधार मानने पर किसानों को करीब 180 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है। लगभग 4.69 लाख गेहूं विक्रेताओं के आधार पर प्रति किसान औसतन करीब 3,800 रुपये का अतिरिक्त लाभ होने का अनुमान है। वहीं लगभग 2.59 लाख सरसों विक्रेताओं के आधार पर प्रति किसान औसतन करीब 12,700 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है।

दलहन और तिलहन की खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे किसानों को दलहन और तिलहन की खेती की ओर प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। यह राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

जौ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,150 रुपये से बढ़ाकर 2,286 रुपये, चने का 5,875 रुपये से बढ़ाकर 5,958 रुपये, मसूर का 7,000 रुपये से बढ़ाकर 7,390 रुपये तथा कुसुम का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,540 रुपये से बढ़ाकर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। कुसुम के मूल्य में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

फसल विविधीकरण को मिलेगा बल

न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से किसानों को गेहूं के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों की ओर रुख करने के लिए बेहतर आर्थिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, चना, मसूर और कुसुम जैसी फसलों का वास्तविक लाभ सरकारी खरीद में वृद्धि पर निर्भर करेगा। दस्तावेज के अनुसार जौ और चना जैसी कुछ फसलें कई बार खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे अधिक मूल्य पर बिकती हैं, इसलिए इन फसलों के लिए मूल्य वृद्धि का वास्तविक लाभ बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

इस प्रकार रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि से हरियाणा के किसानों को न केवल उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है, बल्कि इससे किसानों की आय को मजबूत करने और राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News