कम पैसों में बड़ा रिटर्न ! प्लॉट-फ्लैट और खेती की जमीन में से कहां निवेश करना सही, जाने कहां मिलेगा डबल मुनाफा ?
Udaipur Times, How to Invest in Land : भारत में रियल एस्टेट निवेश को हमेशा से सुरक्षित और लाभकारी माना जाता रहा है। हाल के वर्षों में बढ़ती शहरीकरण की रफ्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का विस्तार और बदलते निवेश रुझानों के कारण खेती की जमीन (Agricultural Land) निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए हैं।
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि शहरों में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें, खेती में बढ़ती रुचि, वीकेंड होम, आर्गेनिक एग्रीकल्चर और लॉन्ग टर्म लैंड एप्रिसिएशन की वजह से बहुत से बायर्स को खेती की जमीन में इन्वेस्ट करने में दिलचस्पी ले रहे हैं।
कौन खरीद सकता है खेती की जमीन?
खेती की जमीन खरीदने की पात्रता राज्य-दर-राज्य अलग होती है। महाराष्ट्र, गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में केवल किसान या कृषि पृष्ठभूमि रखने वाले लोगों को ही खेती की जमीन खरीदने की अनुमति है। किसी व्यक्ति को किसान माना जाने के लिए उसके पास खेती से जुड़ी आय, जमीन का रिकॉर्ड या कृषि कार्य से जुड़े दस्तावेज होने चाहिए। वहीं कुछ राज्यों में गैर-किसानों को भी कुछ शर्तों के साथ कृषि भूमि खरीदने की अनुमति मिल जाती है।
खेती की जमीन खरीदने की क्या है पूरी प्रक्रिया?
1. अपनी पात्रता और राज्य के नियम जांचें
सबसे पहले यह पता करें कि जिस राज्य में जमीन खरीदनी है, वहां गैर-किसान कृषि भूमि खरीद सकते हैं या नहीं।
2. जमीन का सर्वे कराएं
लाइसेंस प्राप्त सर्वेयर से जमीन की नाप कराएं और यह सुनिश्चित करें कि जमीन का क्षेत्रफल टाइटल डीड में दर्ज जानकारी से मेल खाता हो।
3. दस्तावेजों की जांच करें
खरीदारी से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच करें। इसके लिए किसी प्रॉपर्टी वकील की मदद लेना बेहतर माना जाता है।
4. स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन
राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करें और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराएं।
5. म्यूटेशन कराएं
रजिस्ट्रेशन के बाद जमीन के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराने के लिए म्यूटेशन (नामांतरण) कराना जरूरी होता है।
कौन-कौन से दस्तावेजों की जांच जरूरी है?
खेती की जमीन खरीदने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए—
टाइटल डीड
सेल एग्रीमेंट
स्टाम्प ड्यूटी रिकॉर्ड
रजिस्ट्रेशन दस्तावेज
प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट
भूमि माप प्रमाणपत्र
पावर ऑफ अटॉर्नी (यदि लागू हो)
म्यूटेशन रिकॉर्ड
भूमि राजस्व रिकॉर्ड
महाराष्ट्र और गुजरात में जमीन खरीदने से पहले 7/12 एक्सट्रैक्ट और 8A एक्सट्रैक्ट की भी जांच करनी चाहिए। इनमें जमीन के मालिकाना हक, क्षेत्रफल, खेती के प्रकार और भूमि अधिकारों की जानकारी होती है।
क्या एनआरआई खरीद सकते हैं खेती की जमीन?
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 2000 के तहत अनिवासी भारतीय (NRI) सीधे तौर पर भारत में कृषि भूमि नहीं खरीद सकते हैं।
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में एनआरआई कृषि भूमि हासिल कर सकते हैं—
भारत में रहने वाले रिश्तेदार से विरासत के रूप में।
किसी निवासी भारतीय रिश्तेदार से उपहार के रूप में।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष अनुमति मिलने पर, जो बहुत सीमित मामलों में दी जाती है।
खेती की जमीन खरीदने से पहले किन कानूनी बातों का रखें ध्यान?
मालिकाना हक की जांच करें
यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता जमीन का वैध मालिक है और जमीन किसी विवाद में नहीं है।
जमीन पर कोई बकाया नहीं होना चाहिए
जमीन पर बैंक लोन, कोर्ट केस, सरकारी अधिग्रहण या टैक्स बकाया नहीं होना चाहिए।
भूमि उपयोग की पुष्टि करें
यह जांचें कि जमीन वास्तव में कृषि भूमि है और यदि भविष्य में उसका उपयोग बदलना चाहते हैं तो उसके लिए किन अनुमतियों की आवश्यकता होगी।
जमीन की सीमा और क्षेत्रफल की पुष्टि करें
सर्वे के जरिए जमीन की सही सीमा और क्षेत्रफल की पुष्टि करना जरूरी है।
कानूनी सलाह लें
किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की जांच अवश्य कराएं।
क्या खेती की जमीन को बाद में रिहायशी या कमर्शियल जमीन में बदला जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मान लेना गलत होगा कि कृषि भूमि को आसानी से रिहायशी या कमर्शियल उपयोग में बदला जा सकता है। इसके नियम हर राज्य में अलग हैं और ज्यादातर मामलों में सरकारी मंजूरी की जरूरत पड़ती है। कई जमीनों पर पर्यावरण नियमों, ज़ोनिंग कानूनों और सरकारी योजनाओं के कारण भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति नहीं मिलती।
निवेश से पहले क्या रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि भूमि में निवेश करने से पहले सिर्फ कीमत बढ़ने के दावों, विज्ञापनों या सोशल मीडिया प्रचार के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। जमीन की लोकेशन, कानूनी स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी, सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं की पूरी जांच करने के बाद ही निवेश का निर्णय लेना चाहिए।
खेती की जमीन लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है, लेकिन इसमें निवेश करने से पहले सभी कानूनी और वित्तीय पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।
