हरियाणा में खेती को किफायती और फायदेमंद बनाने के लिए बड़ा कदम, कृषि मंत्री ने दिए ये निर्देश
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा में कृषि लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने बड़े नीतिगत कदम उठाने की तैयारी की है।
चंडीगढ़ स्थित अपने कार्यालय में "मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पलसीज" विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे प्रदेश में क्षेत्रवार जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष 'फसली-कैलेंडर' तैयार करें। इस कैलेंडर के माध्यम से किसानों का सही मार्गदर्शन किया जाएगा, ताकि वे कम लागत में अधिक से अधिक मुनाफा अर्जित कर सकें।
इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, महानिदेशक श्री राजनारायण कौशिक, अतिरिक्त निदेशक श्री रामप्रताप सिहाग एवं डॉ. देवेंद्र सिहाग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों की बिजाई के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनमें खाद और पानी की न्यूनतम खपत हो। उन्होंने धान और दलहन जैसी फसलों की ऐसी उत्कृष्ट किस्मों की पहचान करने पर विशेष बल दिया जिनका विदेशों में भी निर्यात किया जा सके। इससे न केवल किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य और अच्छी आमदनी मिलेगी, बल्कि निर्यात बढ़ने से देश की जीडीपी में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।
आगामी सीजन के लिए फसलों के उत्तम बीजों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी फसल के बेहतर उत्पादन में बीज का सबसे बड़ा योगदान होता है, इसलिए अधिकारियों को किसानों को केवल प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीज खरीदने के लिए ही प्रेरित करना चाहिए।
प्राकृतिक खेती को धरातल पर उतारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए श्री श्याम सिंह राणा ने एक अनूठी पहल का सुझाव दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे गौशालाओं में गायों के गोबर और गोमूत्र से 'जीवामृत' तैयार करके किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराने की संभावनाओं को तलाशें, ताकि किसान प्राकृतिक खेती के जरिए अपना उत्पादन बढ़ा सकें। इसके लिए उन्होंने एक समर्पित पायलट प्रोजेक्ट बनाकर काम करने की सलाह दी।
इसके साथ ही, खेती में श्रम और लागत को कम करने के उद्देश्य से मंत्री ने कपास और दलहनी फसलों की कटाई तथा मड़ाई के लिए आधुनिक मशीनीकरण को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को बिजाई से लेकर कटाई तक ऐसे वैज्ञानिक प्रबंधन लागू करने के निर्देश दिए जिससे खेती का खर्च कम हो और यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध हो सके।