8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा अब ये बड़ा फायदा ?
Udaipur Times, 8th Pay Commission : केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के नियम और शर्तों यानी ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (TOR) को मंजूरी दे दी गई है। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर देश के करीब 55 लाख मौजूदा सरकारी कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स पर सीधा पड़ने वाला है। अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग को 18 महीनों का वक्त दिया गया है। इसके बाद कर्मचारियों के वेतनमान और ढांचों के नए ढांचे को तैयार किया जाएगा।
क्या है फिटमेंट फैक्टर और क्यों होता है ये जरूरी
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है।
7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये थी, तो वह बढ़कर 38,550 रुपये हो गई थी।
कर्मचारी यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया
8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन विशेषज्ञ का कहना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है।
पेंशन विशेषज्ञ की माने तो आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है।
‘इनहैंड सैलरी’ में कितनी होगी बढ़त
सैलरी में होने वाली बढ़त को लेकर विशेषज्ञों ने दो अलग-अलग अनुमान जताए हैं-
पहला उदाहरण (60% डीए के आधार पर) : मान लीजिए इस समय किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 100 रुपये है। 60% महंगाई भत्ता (DA) जोड़कर उसकी कुल कमाई 160 रुपये होती है। यदि नए नियमों के बाद बेसिक सैलरी सीधे दोगुनी यानी 200 रुपये हो जाती है, तो उसकी कुल इनहैंड सैलरी में मौजूदा कमाई के मुकाबले करीब 25% की प्रभावी बढ़ोतरी दर्ज होगी।
दूसरा उदाहरण (अगर फिटमेंट फैक्टर 3.0 हुआ) : यदि सरकार कर्मचारी संगठनों की बात मानकर फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर सीधे 3.0 कर देती है, तो शुरुआती स्तर की बेसिक पे में 15 से 20% तक का सीधा इजाफा होगा। इस स्थिति में पुरानी 15,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 45,000 रुपये हो जाएगी।
जानकारों का मानना है कि यदि सरकार बीच का रास्ता भी निकालती है, तो भी कर्मचारियों को एक बेहद सम्मानजनक वेतन वृद्धि देखने को मिलेगी।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि 7वें वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 18,000 रुपये महीना किया था। वहीं, क्लास-I अधिकारियों की शुरुआती सैलरी 56,100 रुपये तय की गई थी। इसके चलते तब कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% का इजाफा हुआ था।
जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा वेतनमान
अक्टूबर 2025 में सरकार ने इस आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी। 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने में समय लगेगा। आयोग ने अलग-अलग पक्षों से सुझाव (मेमोरेंडम) लेने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। वर्तमान में आयोग की टीम अलग-अलग राज्यों का दौरा करके कर्मचारी यूनियनों से मिल रही है।
कर्मचारी संगठनों का ऐसा मानना है कि अगर आयोग अपनी रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपता है, तो सरकार को 1 जनवरी 2026 से लेकर तब तक का पूरा बकाया पैसा यानी एरियर (Aback/Arrears) एक साथ देना होगा।
क्या है वेतन आयोग
केंद्रीय वेतन आयोग (Pay Commission) एक सरकारी पैनल होता है। इसे हर 10 साल में एक बार बनाया जाता है। इस आयोग का काम देश की बदलती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के रहन-सहन के स्तर को बेहतर बनाने के लिए सैलरी, भत्तों और पेंशन में बदलाव की सिफारिश करना होता है।982 वे
