8वें आयोग को लेकर बड़ी अपडेट ! बैठक में आ सकता है बड़ा फैसला, जाने सैलरी पर कितना होगा असर?
Udaipur Times, 8th Pay Commission : 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अहम बैठक आज यानी 7 सितंबर और कल 8 सितंबर को चेन्नई में हो रही है। इसके बाद 9 सितंबर को आयोग पुडुचेरी में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, डीए, सालाना इंक्रीमेंट, वेतन ढांचे और कर्मचारियों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर संगठनों की ओर से अपनी मांगें रखी जाएंगी। इनमें सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत या 7 प्रतिशत किए जाने की मांग भी महत्वपूर्ण है।
8वें वेतन आयोग की यह बैठक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आयोग अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में जाकर कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स संगठनों और अन्य हितधारकों से उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा कर रहा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक चेन्नई में बैठक 7 और 8 सितंबर को निर्धारित है, जबकि पुडुचेरी में 9 सितंबर को आयोग का कार्यक्रम है।
पहली बार दक्षिण भारत में पहुंचा 8वां वेतन आयोग
8वें केंद्रीय वेतन आयोग की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स से सुझाव लिए जा रहे हैं। इससे पहले लखनऊ, दिल्ली और अन्य शहरों में भी आयोग की बैठकें और परामर्श प्रक्रिया हो चुकी है। अब आयोग दक्षिण भारत में पहुंचा है, जहां चेन्नई में दो दिन तक कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत होगी। इसके बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में बैठक होगी। पुडुचेरी सरकार के वित्त विभाग ने भी 9 सितंबर को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के दौरे से संबंधित आधिकारिक सूचना जारी की है। इससे साफ है कि पुडुचेरी में आयोग का कार्यक्रम पहले से निर्धारित है।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
चेन्नई में होने वाली बैठक के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों की ओर से वेतन और भत्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे आयोग के सामने रखे जा सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दों में फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता यानी DA और सालाना इंक्रीमेंट शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े मुद्दों को भी कर्मचारी संगठन आयोग के सामने उठा सकते हैं। कर्मचारी संगठन लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी के साथ-साथ भत्तों में सुधार की मांग कर रहे हैं। इनमें HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस भी एक प्रमुख मुद्दा है। संगठनों की कोशिश है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वेतन और भत्तों में पर्याप्त सुधार किया जाए।
सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने पर संगठनों का जोर
8वें वेतन आयोग के सामने सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाने का मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण है। मौजूदा व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारियों को सामान्य तौर पर 3 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। अब कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ द ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने अपने मेमोरेंडम में सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयीज फेडरेशन और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन की ओर से भी सालाना इंक्रीमेंट को 6 प्रतिशत किए जाने की मांग रखी गई है। वहीं, ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉयी फेडरेशन की मांग इससे भी ज्यादा है। इस संगठन ने
8वें वेतन आयोग के सामने सालाना इंक्रीमेंट को 7 प्रतिशत किए जाने की मांग रखी है। ऐसे में चेन्नई में होने वाली बैठकों के दौरान यह मुद्दा कर्मचारी संगठनों के लिए खास महत्व रख सकता है। हालांकि, अभी 7 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट तय नहीं हुआ है। यह कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी गई मांग है। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश आने और सरकार द्वारा उसे स्वीकार किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सालाना इंक्रीमेंट की दर में कोई बदलाव होता है या नहीं। आयोग ने अभी किसी नए इंक्रीमेंट रेट की घोषणा नहीं की है।
3% से 5% या 7% इंक्रीमेंट होने पर कितना फर्क पड़ेगा?
सालाना इंक्रीमेंट की दर में छोटा सा बदलाव लंबे समय में कर्मचारियों की बेसिक पे और कुल सालाना सैलरी पर बड़ा असर डाल सकता है। इसकी वजह यह है कि हर साल इंक्रीमेंट बढ़ी हुई बेसिक पे पर जुड़ता है और इस तरह समय के साथ इसका असर कंपाउंड होता जाता है। 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये है। अगर सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत की दर से मिलता रहे तो 10 साल की अवधि में बेसिक पे लगभग 23,500 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी मौजूदा उदाहरण में 10 साल में बेसिक पे में करीब 5,500 रुपये का अंतर दिखाई देता है। इसी वजह से कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में सालाना इंक्रीमेंट की दर को बढ़ाया जाए, ताकि कर्मचारियों की सैलरी में समय के साथ होने वाली बढ़ोतरी ज्यादा प्रभावी हो सके।
Level-8 कर्मचारियों के लिए 5% इंक्रीमेंट का क्या असर?
अब इसे Level-8 कर्मचारी के उदाहरण से समझते हैं। 7वें वेतन आयोग के तहत Level-8 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे 47,600 रुपये है। अगर उदाहरण के तौर पर 8वें वेतन आयोग में 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो 47,600 रुपये की बेसिक पे बढ़कर करीब 1,02,340 रुपये हो जाएगी।यहां ध्यान रखना जरूरी है कि 2.15 फिटमेंट फैक्टर अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। यह केवल उदाहरण के तौर पर लिया गया आंकड़ा है, जिसके आधार पर अलग-अलग वेतन परिदृश्यों का अनुमान लगाया जा रहा है।
अब अगर 1,02,340 रुपये की बेसिक पे पर सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत रखा जाता है तो पहले साल की सालाना बेसिक सैलरी करीब 12,28,080 रुपये होगी। कंपाउंडिंग के आधार पर 10 साल बाद यह सालाना बेसिक सैलरी करीब 16,02,366 रुपये तक पहुंच सकती है।वहीं, अगर सालाना इंक्रीमेंट की दर बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दी जाती है तो 10 साल बाद सालाना बेसिक सैलरी करीब 19,05,155 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी 3 प्रतिशत और 5 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट के बीच 10 साल बाद करीब 3 लाख रुपये सालाना का अंतर दिखाई देता है।
7% सालाना इंक्रीमेंट होने पर कितना फायदा?
अब सबसे बड़ी मांग यानी 7 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट की बात करें। अगर 8वें वेतन आयोग के उदाहरण में 1,02,340 रुपये की बेसिक पे पर हर साल 7 प्रतिशत इंक्रीमेंट दिया जाए, तो 10 साल बाद सालाना बेसिक सैलरी करीब 22,57,775 रुपये तक पहुंच सकती है। इस तुलना में 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट की स्थिति में 10 साल बाद सालाना बेसिक सैलरी करीब 16.02 लाख रुपये और 7 प्रतिशत इंक्रीमेंट की स्थिति में करीब 22.58 लाख रुपये बैठती है।
यानी दोनों परिस्थितियों के बीच सालाना करीब 6.55 लाख रुपये का अंतर बन सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के सामने सालाना इंक्रीमेंट की दर बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। हाल की रिपोर्टों में भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत या 7 प्रतिशत किए जाने की संभावित स्थिति के आधार पर कर्मचारियों की लंबे समय की कमाई का अनुमान लगाया गया है।
फिटमेंट फैक्टर भी रहेगा बड़ा मुद्दा
सालाना इंक्रीमेंट के अलावा 8वें वेतन आयोग की चर्चाओं में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। फिटमेंट फैक्टर के जरिए मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में संशोधित करने का आधार तैयार होता है। इसलिए कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि नया फिटमेंट फैक्टर ऐसा हो जिससे उनकी बेसिक पे में पर्याप्त बढ़ोतरी हो सके। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश में फिटमेंट फैक्टर कितना रखा जाएगा। आयोग अभी कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में है। सरकार की ओर से भी अभी नए वेतन ढांचे या अंतिम फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं की गई है।
DA और HRA पर भी नजर
फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट के साथ महंगाई भत्ता यानी DA और HRA भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि नए वेतन ढांचे में महंगाई और मौजूदा खर्च को ध्यान में रखते हुए भत्तों में भी पर्याप्त बदलाव किया जाए। HRA को लेकर भी कर्मचारी संगठन लगातार अपनी मांगें रखते रहे हैं। इसके अलावा पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े मामलों को भी कर्मचारी संगठन आयोग के सामने रखने की कोशिश कर सकते हैं।
अभी क्या तय हुआ है और क्या बाकी?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया परामर्श और सुझाव लेने के चरण में है। चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को होने वाली बैठक और 9 सितंबर को पुडुचेरी में होने वाली बैठक इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स संगठनों और अन्य हितधारकों की मांगों को सुनकर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।इसलिए 7 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट, 2.15 फिटमेंट फैक्टर या किसी खास सैलरी को अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। ये आंकड़े कर्मचारी संगठनों की मांगों और संभावित वेतन गणना पर आधारित उदाहरण हैं।
अंतिम फैसला 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत से बढ़ेगा या नहीं और DA-HRA समेत दूसरे भत्तों में कितना बदलाव किया जाएगा। चेन्नई और पुडुचेरी की बैठकों में कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी जाने वाली मांगें इस पूरी प्रक्रिया में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन्हीं सुझावों के आधार पर आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।