दिल्ली मेट्रो से जुड़ी बड़ी अपडेट ! यहां बनेंगे 23 नए स्टेशन, देखें कहां-कहां से गुजरेगी ?
Udaipur Times, Delhi Metro Golden Line : दिल्ली मेट्रो के फेज-4 में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच बन रही दिल्ली मेट्रो की गोल्डन लाइन का एक हिस्सा दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 8.4 किलोमीटर लंबे तुगलकाबाद-संगम विहार सेक्शन को दिसंबर तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस सेक्शन के खुलने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को मौजूदा रूट की तुलना में अधिक सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिल सकती है।
एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर पर निर्माण का करीब 83 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। अब ट्रैक बिछाने, ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़े काम तेजी से किए जा रहे हैं। वहीं, इस हिस्से में टनलिंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है। परियोजना के पूरी तरह तैयार होने के बाद दक्षिण दिल्ली और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों के बीच यात्रा का नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।
23.6 किलोमीटर के कॉरिडोर में बनेंगे 15 स्टेशन
एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच बन रहा गोल्डन लाइन कॉरिडोर करीब 23.6 किलोमीटर लंबा है। इस पूरे रूट पर कुल 15 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर का उद्देश्य दक्षिण दिल्ली के प्रमुख इलाकों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी देना है। परियोजना के तहत कई हिस्सों में निर्माण का काम तेजी से चल रहा है और कुल प्रगति करीब 83 फीसदी तक पहुंचने की बात कही गई है।
DMRC के मुताबिक, ट्रैक बिछाने के साथ-साथ ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का काम भी किया जा रहा है। मेट्रो संचालन के लिए इन सभी तकनीकी कामों का पूरा होना जरूरी है। टनलिंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है, जिससे परियोजना के एक बड़े निर्माण चरण को पूरा किया जा चुका है।
दिसंबर तक शुरू हो सकता है पहला सेक्शन
गोल्डन लाइन के पूरे कॉरिडोर के तैयार होने से पहले इसके कुछ हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से यात्रियों के लिए खोला जा सकता है। इसी के तहत तुगलकाबाद से संगम विहार के बीच करीब 8.4 किलोमीटर लंबे सेक्शन को दिसंबर 2026 तक शुरू करने की तैयारी बताई जा रही है। अगर यह सेक्शन तय समय के आसपास शुरू होता है तो दक्षिण दिल्ली के यात्रियों को मेट्रो नेटवर्क में एक नया विकल्प मिलेगा।
खासकर संगम विहार, तुगलकाबाद और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा इंटरचेंज के जरिए दूसरे मेट्रो कॉरिडोर तक पहुंच आसान हो सकती है।
डबल-डेकर फ्लाईओवर है इस रूट की खासियत
गोल्डन लाइन के इस कॉरिडोर की सबसे खास इंजीनियरिंग विशेषताओं में करीब 2.4 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर फ्लाईओवर शामिल है। यह संरचना संगम विहार और आंबेडकर नगर के बीच बनाई जा रही है। इसमें नीचे सड़क पर वाहनों की आवाजाही होगी, जबकि उसके ऊपर मेट्रो ट्रैक और ट्रेनें संचालित होंगी। एक ही संरचना में सड़क और मेट्रो को शामिल करने का उद्देश्य सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना है।
दक्षिण दिल्ली के जिन इलाकों में जमीन उपलब्धता और ट्रैफिक दोनों बड़ी चुनौती हैं, वहां इस तरह की व्यवस्था से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा सड़क के ऊपर अलग मेट्रो कॉरिडोर के लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत भी कम हो सकती है।
तुगलकाबाद बनेगा बड़ा इंटरचेंज हब
गोल्डन लाइन के शुरू होने के बाद तुगलकाबाद स्टेशन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में महत्वपूर्ण इंटरचेंज के तौर पर उभर सकता है। यहां नई गोल्डन लाइन और मौजूदा वायलेट लाइन के बीच कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। वायलेट लाइन कश्मीरी गेट से फरीदाबाद के राजा नाहर सिंह और बल्लभगढ़ की दिशा में जाती है। इस इंटरचेंज का सबसे बड़ा फायदा दक्षिण दिल्ली और फरीदाबाद के बीच सफर करने वाले यात्रियों को मिल सकता है।
अभी फरीदाबाद, बदरपुर या बल्लभगढ़ की तरफ से आने वाले यात्रियों को दक्षिण दिल्ली के महरौली, छतरपुर या गुरुग्राम की दिशा में जाने के लिए कई बार लंबा रूट लेना पड़ता है। नई कनेक्टिविटी उपलब्ध होने के बाद तुगलकाबाद के रास्ते यात्रा को अधिक सीधा और सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
फरीदाबाद से दक्षिण दिल्ली का सफर होगा आसान
गोल्डन लाइन का कनेक्शन वायलेट लाइन से होने के बाद फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। फरीदाबाद, बदरपुर और बल्लभगढ़ से आने वाले यात्री तुगलकाबाद में इंटरचेंज लेकर नई लाइन की तरफ जा सकेंगे।
इसके जरिए महरौली, छतरपुर और आसपास के इलाकों की ओर जाने वाले यात्रियों को मौजूदा लंबे रूट की तुलना में अधिक सीधी कनेक्टिविटी मिल सकती है। इससे रोजाना ऑफिस, कॉलेज और अन्य कामों के लिए दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों का समय बचने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय यात्री के शुरुआती और अंतिम स्टेशन के साथ-साथ इंटरचेंज और ट्रेन संचालन पर निर्भर करेगा।
संगम विहार और आंबेडकर नगर को भी मिलेगा फायदा
गोल्डन लाइन के इस हिस्से से दक्षिण दिल्ली के कई घनी आबादी वाले इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। संगम विहार और आंबेडकर नगर जैसे इलाकों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी लंबे समय से महत्वपूर्ण जरूरत रही है। नए कॉरिडोर के शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों के लोगों को सार्वजनिक परिवहन का एक और तेज विकल्प मिल सकता है।
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार होने से सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहन या बस से यात्रा करते हैं। ऐसे में नई मेट्रो लाइन लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर आकर्षित कर सकती है और प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में योगदान दे सकती है।
एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक बनेगा नया मेट्रो कॉरिडोर
गोल्डन लाइन का पूरा कॉरिडोर एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक प्रस्तावित है। एयरोसिटी दिल्ली के प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब में शामिल है और यहां से एयरपोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों तक कनेक्टिविटी उपलब्ध है। ऐसे में गोल्डन लाइन के जरिए दक्षिण दिल्ली के क्षेत्रों को एयरोसिटी से जोड़ने का भी फायदा मिल सकता है।
कॉरिडोर के पूरी तरह शुरू होने के बाद यात्रियों के लिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों के बीच मेट्रो से यात्रा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे दक्षिण दिल्ली और एयरपोर्ट क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य में तेजी, 83 फीसदी काम पूरा
एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर पर अब तक करीब 83 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। निर्माण के प्रमुख हिस्सों में टनलिंग का काम पूरा हो चुका है। इसके बाद ट्रैक बिछाने, ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग से जुड़े कार्यों को पूरा किया जा रहा है।
मेट्रो लाइन को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले ट्रैक, बिजली, सिग्नलिंग, स्टेशन और सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी परीक्षण पूरे किए जाएंगे। इसलिए निर्माण पूरा होने के बाद भी यात्री सेवा शुरू करने से पहले कई तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
गोल्डन लाइन को दिल्ली-एनसीआर के मेट्रो नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर दक्षिण दिल्ली और फरीदाबाद के बीच बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिल सकती है। नई लाइन के जरिए मौजूदा मेट्रो कॉरिडोर के बीच इंटरचेंज बढ़ेंगे और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए नए रूट विकल्प मिलेंगे।
एयरोसिटी, तुगलकाबाद, संगम विहार और दक्षिण दिल्ली के अन्य हिस्सों को जोड़ने वाली यह लाइन आगे चलकर फरीदाबाद की तरफ से आने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे दिल्ली और एनसीआर के बीच सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क और मजबूत होगा।
दिसंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद
दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत बन रही गोल्डन लाइन का एक प्रमुख हिस्सा दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। तुगलकाबाद-संगम विहार के करीब 8.4 किलोमीटर लंबे सेक्शन को पहले यात्रियों के लिए खोलने की तैयारी बताई जा रही है। इसके बाद कॉरिडोर के बाकी हिस्सों पर काम पूरा होने के साथ चरणबद्ध तरीके से कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर 23.6 किलोमीटर लंबी और 15 स्टेशनों वाली गोल्डन लाइन दक्षिण दिल्ली और दिल्ली-एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण मेट्रो परियोजना बन सकती है। तुगलकाबाद में वायलेट लाइन से इंटरचेंज और फरीदाबाद की ओर से आने वाले यात्रियों को नई कनेक्टिविटी मिलने से इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद एयरोसिटी से लेकर दक्षिण दिल्ली और फरीदाबाद तक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को एक नया विकल्प मिल सकेगा।