Biogas Plant : यहां तैयार होगा नया बायोगैस प्लांट ! 120 करोड़ के निवेश से लोगों को मिलेगी नौकरियां

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यहां तैयार होगा नया बायोगैस प्लांट ! 120 करोड़ के निवेश से लोगों को मिलेगी नौकरियां 

Udaipur Times, Biogas Production Hub : ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार और निजी कंपनियों की साझेदारी से जिले में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मेगा प्लान तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को विकसित कर देश की ऊर्जा निर्भरता को कम करना है।

बड़े बायोगैस प्लांट

जिले में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की निजी कंपनियां बायोगैस उत्पादन के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही हैं। कुमारबाग में वर्द्ध्न बायोगैस प्राइवेट लिमिटेड का प्लांट पहले से ही चालू है। यहां पर तीन महीने पहले प्रतिदिन 6 टन बायोगैस का उत्पादन शुरू हुआ है। मुंबई की भारत जीपीएस बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड भी कुमारबाग में नया प्लांट लगाएगी, जिस पर करीब 120 करोड़ रुपये का निवेश होगा। 

कानपुर की नौटेक बायो फ्यूल्स लिमिटेड कंपनी गौनाहा के रमपुरवा और पिपरिया में दो प्लांट लगाएगी, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 10-10 टन प्रतिदिन होगी। इस परियोजना पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

गैस उत्पादन का लक्ष्य

सभी प्रस्तावित प्लांटों के शुरू होने के बाद पश्चिमी चंपारण जिले में प्रतिदिन लगभग 31 टन बायोगैस का उत्पादन होने लगेगा। वर्तमान में कुमारबाग प्लांट से उत्पादित गैस भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी जा रही है। भविष्य में इसे पाइपलाइन के माध्यम से घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की योजना भी है।

मुख्य कच्चा माल

इस परियोजना में चीनी मिलों से निकलने वाला प्रेश मड (Press Mud) और पशुपालकों से एकत्र किया गया गोबर प्रमुख कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे न केवल बायोगैस उत्पादन होगा, बल्कि कृषि अपशिष्ट का भी सही उपयोग सुनिश्चित है।

किसानों को भी होगा लाभ, मिलेगी जैविक खाद

इन बायोगैस प्लांटों से सिर्फ ऊर्जा उत्पादन ही नहीं होगा, बल्कि बड़ी मात्रा में ठोस और तरल जैविक खाद भी तैयार की जाएगी। यह खाद किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा।

बड़ा कदम

अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना न केवल पश्चिम चंपारण बल्कि पूरे राज्य के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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