शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्षकल्याण पर्व मनाया


शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्षकल्याण पर्व मनाया
 

भक्तों ने देश भर में ऑनलाइन धूमधाम से मनाया  शांतिनाथ भगवान का जन्म एवं मोक्षकल्याण पर्व
 
 
शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्षकल्याण पर्व मनाया
सर्व कल्याण की कामना के साथ हुए विभिन्न अभिषेक,भगवान को चढ़ायें लड्डू
 

उदयपुर 21 मई 2020। शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर भुवाणा की ओर से आज भुवाणा स्थित  शांतिनाथ मंदिर में जैन धर्म के 16 वें तीर्थंकर श्री 1008  शांतिनाथ भगवान का जन्म,तप एवं मोक्षकल्याण पर्व मनाया गया।

भुवाणा मंदिर के अध्यक्ष रूपलाल चित्तौड़ा ने बताया कि इस अवसर पर भगवान की प्रतिमा पर पंचामृत अभिषेक किया गया। इस अवसर पर अनिल चित्तौड़ा, राजकुमार जैन, ममता रांका, कमला, पुष्पा, सीमा, उदयपुर समाज अध्यक्ष सुरेश पदमावत, प्रभुलाल वस्या का सहयोग रहा। मंमता रांका ने सभी को सोश्यल डिस्टेन्सिंग की पालना कराते हुए श्री जी की शांति धारा करवाई।

ध्यानोदय क्षेत्र बलीचा और अखिल भारतीय सुप्रकाश ज्योति मंच की ओर से गुरू मां सुप्रकाशमति माताजी के सानिध्य में कोरोना महामारी से बचाव के लिये बलीचा स्थित ध्यानोदय क्षेत्र में जैन धर्म के 16 वें तीर्थंकर 1008 शांतिनाथ भगवान के जन्म,तप एवं मोक्षकल्याणक महोत्सव का धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ आज प्रातः साढ़े सात बजे ध्यानोदय क्षेत्र बलीचा सहित देश भर में हजारों भक्तों ने ऑनलाइन भगवान शंातिनाथ का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन कर इसका लाभ लिया।  

सुप्रकाश ज्योति मंच के मुख्य सरंक्षक ओमप्रकाश गोदावत ने बताया कि राष्ट्र संत गुरु माँ गणिनी आर्यिका 105 श्री ’सुप्रकाश’मति माताजी के सानिध्य में श्रावक-श्राविकाओं ने प्रातः ठीक 7.30 बजे प्रभु शांतिनाथ पर प्रथम जल की धारा संसार में व्याप्त सभी दुखो के नाश की भावना से अभिषेक किया गया। इक्षु रस, अनार रस, आम रस,मौसमी रस, अँगूर रस, नारियल रस से अभिषेक कर यह भावना की गई की संसार के इस दुख से मुझे आत्मा के रस का आनंद प्राप्त हो।

दूध से अभिषेक कर यह भावना व्यक्त की की है प्रभु मेरे अंदर का क्रोध शांत हो और कर्म का नाश हो। उन्होंने बताया कि दही के अभिषेक कर प्रभु से प्रार्थना की गई कि मेरा मन दही के समान ठंडा और कोमल रहे। सर्वोषधि का अभिषेक कर यह कामना गई की इस संसार से व्याधि का नाश हो। भक्तों ने चार कलश से हमारी आत्मा को दुख देने वाले घाति कर्म का नाश हो की भावना से अभिषेक किया गया। 

भगवान की प्रतिमा पर ’चन्दन लेपन’ एवं पुष्पों की वृष्टि की गई तो मानो ऐसा लगा कि देव पुष्प वृष्टि कर रहे हो। ईश्वर से यह प्रार्थना की गई कि संसार की इस वेदना से मुझे मुक्ति मिलें।’पूर्ण’ कलश धारा करके ऐसा महसूस हुआ की मेरा शरीर सोने के समान तप कर मोक्ष फल को प्राप्त कर लेगा। विभिन्न प्रकार के अभिषेक पश्चात भगवान शांतिनाथ की ’मंगल आरती’ की गई, इस अवसर पर वाद्य यँत्र बजाये गये तो ऐसा महसूस हुआ जैसे आत्मा में कोई ज्योति प्रज्ज्वलित हो रही हो। 

’महा शांति धारा का’ शुभारम्भ हुआ सम्पूर्ण दूध की महा शांति धारा मे भगवान की प्रतिमा ऐसे लग रही जैसे सोना दूध मे परिवर्तन हो गया प्रभु शांतिनाथ हमें इस संसार सागर मे आत्मा शांति की प्राप्ति हों, यह भावना सभी भक्तों ने ऑनलाइन व्यक्त की। प्रभु शान्तिनाथ की भक्ति मे सभी इस के बाद ऐसे तल्लीन हो गए और प्रभु कोई विभिन्न प्रकार से अष्ट द्रव्य से पूजा की। प्रभु के मोक्ष कल्याणक पर बूँदी का लड्डू चढ़ाये गये। इस आयोजन के सौधर्म इंद्र बनने का शोभाग्य कुवैत प्रवासी जयंतीलाल, भगवती लाल, विनोद रजावत ने ऑनलाइन प्राप्त किया।

इस अवसर पर गुरु माँ ने कहा कि आज जो व्याधि कोरोना और ये अम्फान जैसे तूफान आ रहे, इस की मूल जड़ आये दिन अत्याचार, बलात्कार, निरीह पशुओ की हत्या है। जब जब पृथ्वी पर पाप बढ़ा है तो प्रभु ने अपने होने का अहसास कराया है। मानव अपने अस्तित्व के आगे कभी कभी किसी कोई नहीं मानता, यहीं अहम मानव की भूल है। प्रभु की भक्ति में शक्ति है, बस मन लगाने की आवश्यकता है। गोदावत ने बताया कि इस आयोजन में विशेष नागपुर, कोटा, रामगंज मंडी, जयपुर,  मुंबई, कोडरमा, झारखण्ड, धुलियान, पश्चिम बंगाल. मगवास, खाखड़ झाड़ोल, फलासिया और भी कई स्थानों पर इस आयोजन से जुड़ कर भक्ति की गई।

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