भाजपा और कांग्रेस ने चलाए आखिरी तीर
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस द्वारा अलग-अलग प्रेस वार्ताएं रखी गई। प्रेस के समक्ष दोनों राजनीतिक गुटों ने अपनी अपनी सरकार बनाने का दावा किया और विपक्षी पार्टी के खिलाफ अपना दृष्टिकोण रखा।
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस द्वारा अलग-अलग प्रेस वार्ताएं रखी गई। प्रेस के समक्ष दोनों राजनीतिक गुटों ने अपनी अपनी सरकार बनाने का दावा किया और विपक्षी पार्टी के खिलाफ अपना दृष्टिकोण रखा।
धीरेन्द्र सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश संयोजक (उद्योग प्रकोष्ठ) ने बताया कि, कांग्रेस एंव भाजपा के घोषणा पत्र में व्यापार तथा खनिज के लिये की गई घोषणाओं की तुलना की जाए तो कांग्रेस ने जहाँ नए उद्योग पर तीन साल कर मुक्ति का प्रावधान, जयपुर में रत्न आभूशण केंद्र,रिफाइनरी को प्रोत्साहन मजदूर कल्याण की घोषणाएं की है, तो वहीँ भाजपा ने उद्योगों व उद्धमियों की छोटी-बड़ी जरुरतो को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों को 2 लाख का बिमा, क्रेडिट कार्ड, माइनिंग को उद्योग का दर्जा, रिहायशी भूमि पर बने होटलों का नियमन, हस्त शिल्प निदेशालय की स्थापना जैसे कार्य को करने की बात रखी है।
भाजपा उद्योग प्रकोष्ठ द्वारा प्रेस वार्ता में उद्योग प्रकोष्ठ एंव उद्धमियों की तरफ से चुनाव में भाजपा को पूर्ण समर्थन देने का प्रण लिया गया।
राज्य में बनेगी कांग्रेस की सरकार: मोहन प्रकाश

कांग्रेस पार्टी ने शास्त्री सर्कल के निकट अलका होटल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया; जहाँ अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रिय महासचिव प्रकाश मोहन ने दावा किया कि इस बार भी कांग्रेस की ही सरकार बनेगी।
प्रकाश मोहन ने वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तारीफ करते हुए कहा कि, कांग्रेस सरकार के समय के चलते राज्य में कई विकास कार्य हुए, हर तरफ से गरीब व कमजोर तबके को शक्ति प्रदान की गई, ग्रामीण को समझिक सुरक्षा प्रदान की और जयपुर में मेट्रो का पदार्पण किया गया।
भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि, 2003-2008 तक कुराज शासन चला और बीजेपी सरकार के समय पार्टी जयपुर से ना चलते हुए दिल्ली व देहरादून से चलती रही।
प्रेस वार्ता के दौरान महासचिव ने एक त्याग पत्र दिखाया, जो उनके अनुसार कुछ दिनों पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राजनाथ सिंह को लिखा था। मोहन प्रकाश ने कहा कि, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओ का ही अगर पार्टी के ऊपर से भरोसा उठ गया है, तो आम जन कैसे भरोसा करेगी?
वहीँ इस त्याग पत्र को दिखाए जाने पर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओ में कॉन्फ्रेन्स के दौरान ही कानाफूसी हुई कि, इस त्याग पत्र को पहले जारी क्यों नहीं किया गया?
