हरियाणा में लाल डोरा के जोहड़ों पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर ! सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के गांवों में लाल डोरा (आबादी देह) के अंदर स्थित जोहड़ों और तालाबों के सौंदर्यीकरण के साथ उनका रकबा तय करने को लेकर राज्य सरकार नई एसओपी जारी करेगी। इसी के मद्देनजर जिले में लाल डोरा में मौजूद जोहड़ व तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि तालाबों के सुधारीकरण के दौरान काफी गांवों में जोहड़ का सटीक रकबा स्पष्ट न होने के कारण लगातार भूमि विवाद सामने आ रहे हैं। नई एसओपी में सरकार इस तकनीकी खामियों को दूर करेगी।
बता दें कि लाल डोरा में मौजूद तालाब अथवा जोहड़ का कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। यह कभी गांव की बसासत के समय रियासतकालीन में किसी दस्तावेज में दर्ज है तो वही इसका प्रमाण है। अन्यथा मौजूदा समय में इन तालाबों एवं जोहड़ों का कोई स्पष्ट रकबा नहीं है। अब अधिकतर गांवों के जोहड़ एवं तालाब गांव की आबादी क्षेत्र में आ गए हैं, जिनके कारण अधिकतर पर कब्जा है तो किसी का अस्तित्व ही समाप्त होने की तरफ है।
हालांकि अधिकतर मामलों में जिला कलेक्टर की अदालत इन जोहड़ों से अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी करती है, लेकिन उन आदेशों की स्पष्ट व्याख्या में कई तकनीकी खामियां रह जाती हैं। अधिकतर केसों में दूसरे पक्ष के पास भी दावा पुष्ट करने का कोई प्रमाण नहीं होता है, जिसके चलते वह भी कोई दावा नहीं कर सकता है। ऐसे मामलों के मद्देनजर अब प्रशासन ने उन गांवों में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है, जहां जोहड़ों का सीमांकन अधूरा या विवादित है। अब नई एसओपी के तहत सरकार इन जोहड़ों का सटीक रकबा और सीमांकन संबंधी अन्य दिशा-निर्देश तय करेगी, जिससे कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें दूर हो सकें।
एसओपी से होगा लाभ, स्पष्ट होगा रकबा
रिटायर्ड डीडीपीओ एचपी बंसल के मुताबिक लाल डोरा के अंदर स्पष्ट सीमांकन नहीं होने की स्थिति में कई स्तर पर तकनीकी दिक्कतें आती हैं। अब एसओपी जारी होने से तालाब अथवा जोहड़ का रकबा स्पष्ट हो जाएगा और पंचायत विभाग के साथ राजस्व विभाग की टीमें तालाब के जलभराव क्षेत्र का नया रिकॉर्ड तैयार करेंगी। इसके बाद तकनीकी खामियों को दूर होने के साथ अतिक्रमण हटाने में भी आसानी होगी।
क्या होता है लाल डोरा में जोहड़ों का रिकॉर्ड?
राजस्व नियमों के तहत लाल डोरा के बाहर स्थित कृषि भूमि का तो विस्तृत खसरा-खतौनी और शजरा रिकॉर्ड होता है, लेकिन लाल डोरा के अंदर मौजूद पारंपरिक जोहड़ों का कोई सुव्यवस्थित पुराना खसरा नंबर नहीं होता था। इसलिए लाल डोरा से बाहर जो जोहड़ एवं तालाब हैं, वह गैर मुमकिन में दर्ज हैं जबकि जो आबादी में हैं, उनकी ऐसी कोई श्रेणी नहीं है। पंचायतों के पास सामान्यतः मिल्कीयत देह आबादी देह के नक्शे में जोहड़ के स्थान का रेखांकन तो होता है, लेकिन क्षेत्रफल लिखित दस्तावेज में नहीं होता है।
लगभग साढ़े 6 हजार जोहड़...
राज्य सरकार हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के माध्यम से इन जोहड़ों को उनके मूल स्वरूप में लाने के लिए काम कर रही है। अमृत सरोवर योजना के तहत सरकार इन तालाबों एवं जोहड़ों का सौंदर्यीकरण का काम कर रही है। जिसके अनुसार राज्य में लाल डोरा के अंदर लगभग साढ़े 6 हजार जोहड़ माने गए हैं। जिला महेंद्रगढ़ के कुल 374 से अधिक गांवों में से लगभग 180 से अधिक गांवों में लाल डोरा के अंदर पारंपरिक जोहड़ या तालाब मौजूद हैं। इनका रकबा स्पष्ट न होने और पानी सूखने के कारण इनके किनारों पर सबसे अधिक अवैध कब्जे हुए हैं।
