दिल्ली से इन 4 रूटों पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन ! पटना, जयपुर, अमृतसर, मुंबई समेत 50 शहरों को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, देखें पूरा रूटमैप
Udaipur Times, Bullet Train Delhi to Varanasi : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद केंद्र सरकार अब देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने की तैयारी में है। सरकार की योजना दिल्ली को देश का सबसे बड़ा Bullet Train Hub बनाने की है। इसके तहत राजधानी से चार बड़े हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी, दिल्ली-अहमदाबाद और दिल्ली-अमृतसर-जम्मू शामिल हैं। इन परियोजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
सबसे पहले बनेगा दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर
सरकार की प्राथमिकता 865 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को पूरा करने की है। इस परियोजना पर करीब 1.21 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके पूरा होने के बाद इसे पटना और सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा। विस्तार के बाद यह करीब 1,705 किलोमीटर लंबा होकर भारत का सबसे लंबा Bullet Train Corridor बन जाएगा।

इन शहरों से होकर गुजरेगी ट्रेन (Bullet Train)
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन हजरत निजामुद्दीन, नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, न्यू भदोही और वाराणसी से होकर गुजरेगी। इसके अलावा लखनऊ से अयोध्या तक करीब 135 किलोमीटर का अलग लिंक भी बनाया जाएगा।
सफर होगा बेहद आसान
इस हाई-स्पीड रेल परियोजना के शुरू होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
दिल्ली से लखनऊ – 2 घंटे 10 मिनट
नोएडा एयरपोर्ट से लखनऊ – 1 घंटा 40 मिनट
दिल्ली से वाराणसी – 3 घंटे 50 मिनट
दिल्ली से सिलीगुड़ी – करीब 6 घंटे (अभी लगभग 20 घंटे लगते हैं)
दिल्ली-अहमदाबाद कॉरिडोर (Bullet Train Corridor)
करीब 886 किलोमीटर लंबा दिल्ली-अहमदाबाद Bullet Train Corridor भी सरकार की प्राथमिक परियोजनाओं में शामिल है। यह दिल्ली, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, नीमराना, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों को जोड़ेगा। भविष्य में यह मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन नेटवर्क से भी कनेक्ट होगा, जिससे दिल्ली से मुंबई तक हाई-स्पीड रेल यात्रा संभव होगी।
दिल्ली-अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर
सरकार दिल्ली-अमृतसर-जम्मू हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर भी काम कर रही है। यह रूट दिल्ली, रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर से होकर जम्मू और भविष्य में कटरा तक पहुंचेगा। इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली से अमृतसर की दूरी करीब 2 घंटे में तय की जा सकेगी। इसकी लंबाई लगभग 450 से 500 किलोमीटर होगी।
अन्य हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं
इनके अलावा सरकार वाराणसी-हावड़ा, मुंबई-नागपुर, मुंबई-हैदराबाद और चेन्नई,बेंगलुरु, मैसूर जैसे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर भी काम कर रही है। लक्ष्य पूरे देश में आधुनिक बुलेट ट्रेन नेटवर्क विकसित करना है।
बाद में पटना और सिलीगुड़ी तक होगा विस्तार
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को आगे पटना और सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा। प्रस्तावित रूट नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, वाराणसी, पटना और न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी) से होकर गुजर सकता है। भविष्य में इसे गुवाहाटी तक बढ़ाने की भी योजना है।
हर साल 250 किमी ट्रैक बनाने का लक्ष्य
रेल मंत्रालय की योजना हर साल करीब 250 किलोमीटर बुलेट ट्रेन ट्रैक तैयार करने की है। सात प्रमुख हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये निवेश का अनुमान है। फिलहाल दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की डीपीआर (Detailed Project Report) की समीक्षा चल रही है, जबकि वाराणसी-सिलीगुड़ी सेक्शन की डीपीआर उसके बाद तैयार की जाएगी। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू करना है।
स्वदेशी Bullet Train भी होगी तैयार
भारत अपनी पहली स्वदेशी Bullet Train 'B35' भी विकसित कर रहा है। इसे BEML तैयार कर रही है और इसका पहला ट्रायल 2027 में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर होने की संभावना है। यह ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे तक की परिचालन गति पर चल सकेगी और भविष्य में भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का अहम हिस्सा बनेगी।
मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट में समुद्र के नीचे बनेगी सुरंग
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Bullet Train) परियोजना पर भी काम तेजी से जारी है। रेलवे ने खराब मौसम के बावजूद अधिकारियों को परियोजना में देरी न करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 20.37 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है, जिसमें करीब 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे होगा। यह सुरंग जमीन से 65 मीटर नीचे तैयार की जाएगी।
इसके निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जाएगा। मार्च 2026 में इस परियोजना के लिए दो अत्याधुनिक TBM मशीनें समुद्री मार्ग से भारत लाई गई थीं। इन मशीनों का निर्माण जर्मनी में हुआ है और इनका इस्तेमाल अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। रेलवे का लक्ष्य मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को तय समय पर पूरा करना है, जिसके पहले चरण के 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
