जीवन में दूसरों को आगे बढ़ाते रहे सीए ओ.पी.चपलोत

जीवन में दूसरों को आगे बढ़ाते रहे सीए ओ.पी.चपलोत

सादा जीवन उच्च विचार कहने-सुनने को तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन इस पर चलना और उसके साथ आत्मसात करना हिमालय की चोटी पर चढ़ने के समान है। जीवन में कथन को सत्य के रूप में चरितार्थ कर कांटो भरे उस राह पर चलते हुए शहर के जाने मानें चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट डॉ.ओम प्रकाश चपलोत कभी भी उस सत्य की राह एवं सादा जीवन उच्च विचार के ध्येय से भटके नहीं।

 

जीवन में दूसरों को आगे बढ़ाते रहे सीए ओ.पी.चपलोत

सादा जीवन उच्च विचार कहने-सुनने को तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन इस पर चलना और उसके साथ आत्मसात करना हिमालय की चोटी पर चढ़ने के समान है। जीवन में कथन को सत्य के रूप में चरितार्थ कर कांटो भरे उस राह पर चलते हुए शहर के जाने मानें चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट डॉ.ओम प्रकाश चपलोत कभी भी उस सत्य की राह एवं सादा जीवन उच्च विचार के ध्येय से भटके नहीं।

फतहनगर के सनवाड़ जैसे छोटे से कस्बे में जन्म लेकर उदयपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया और न केवल इस शहर को समाज सेवा, आध्यात्म,प्रोफेशन के साथ न्याय करने जैसे सेवा पथ पर न केवल चलना सिखाया वरन् स्वयं चले भी, तभी आज भी वे दूसरों लिये प्रेरणादायी बने हुए है। सीए डॉ.चपलोत ने अपने जीवन में अपने हाथों से इतने सीए निकाले कि आज वे विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर रह कर अपने गुरू का नाम रोशन कर रहे है। यदि यह कहा जाये कि चपलोत अपने आप में एक विश्वविद्यालय है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि इस विश्वविद्यालय में हर तरह की शिक्षा मिलती है और इसमें शिक्षा पाने वाला कभी फेल हो कर नहीं निकलता है।

जिस प्रकार से सीए डॉ. चपलोत जीवन एवं व्यावसायिक क्षेत्र में सघर्ष कर इस मुकाम पर पंहुचे है कि हर कोई उस क्षितिज को हासिल करना चाहता है। डॉ. चपलोत ने जीवन में शिक्षा को सर्वोपरि माना है और यही कारण है कि वे अपने इस प्रोफेशन में अपने पुत्र सीए महावीर चपलोत को न केवल सीए बनाया वरन् उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल करने के लिये प्रेरित किया। इन्होंने पुत्रमोह में न रहते हुए अपनी पुत्री एवं पुत्रवधु को भी सीए बनाया जो आज अनेक बैंकिंग एवं सामाजिक पदों पर आसीन है।

ओ.पी.चपलोत ने अपने जीवन में अपने पिता स्वर्गीय शंकरलाल चपलोत का चेहरा नहीं देखा लेकिन उनकी माता श्रीमती नजर देवी ने अपने पति के सपनों को पूरा करने के लिये ओ.पी.चपलोत को शिक्षा दिलानें में कोई कसर नहीं छोड़ी और शिक्षा व आध्यात्म के उस शिखर पर पंहुचाया जहाँ से वे दूसरों के लिये प्रेरणादायक बन सकें। इनकी माता का मानना था कि जीवन में सबकुछ लुट सकता है लेकिन शिक्षा ही ऐसा धन है जिसे लुटा नहीं जा सकता है,वरन् उसे बांटा जा सकता है और ओ.पी.चपलोत ने अपने जीवन में एक स्कोलर की भूमिका का निर्वहन करते हुए शिक्षा को केवल बांटा ही।

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उम्र के इस पड़ाव में जंहा व्यक्ति हर कार्य से सेवानिवृत्ति लेकर सिर्फ आध्यात्म की ओर चलने का मानस बनता है लेकिन सीए डॉ. चपलोत ने 64 वर्ष की उम्र में युवाओं के लिये पथप्रदर्शक बनते हुए इन्फोरमेशन सिस्टम ऑडिट कोर्स विषय में 75 प्रतिशत अंक हासिल किये और युवाओं को यह भी प्रेरणा दी कि सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। सेवानिवृत्ति की उम्र में अपने व्यवसाय को उच्च आयाम प्रदान करने के लिये नवाचार अपनाते हुए नई पीढ़ी को प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय से प्राकृत भाषा में एम.ए. की उपाधि प्राप्त कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

सीए डॉ. चपलोत की सर्वधर्म के प्रति गहन रूचि होेने के कारण उन्होंने जैन शास्त्रों में स्थानक सूत्र में भी पीएचडी कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर एक अनोखी उपलब्धि हासिल की। शिक्षा के प्रति उनके बढ़ते कदम यहीं नहीं थमे और उन्होंने उम्र के इस पड़ाव में आमजन को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिये एलएलबी प्रथम श्रेणी में उर्तीण की।

डॉ. चपलोत की रूचि सिर्फ जैन समाज में ही नहीं वरन् अन्य समाज में भी है और यही कारण है कि उन्होंने बड़ी-बड़ी संस्थाओं एवं अनेक समाज के विधान-उप विधान व नियमावली बनाकर लोगों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर समाज सेवा के कार्यो को उच्च देने हेतु अनेक मंच प्रदान किये। समाज सेवी संस्था लायंस क्लब एवं जैन सोश्यल ग्रुप जैसे संगठन से जुड़े रहकर अनेक पदों को अपने कार्यो से सुशोभित किया। इन्होेंने व्यावसायिक, धार्मिक,सामाजिक क्षेत्र की अनेक संस्थाओं की स्थापना के साथ-साथ जीवन पर्यन्त उनके मार्गदर्शक व सहयोगी रहे है। पिछले कई वर्षो से योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागृत करते हुए लोगों को उत्तम स्वास्थ्य व योग का प्रशिक्षण भी दे रहे है।

एक हाथ से दान देने पर दूसरे हाथ को मालूम नहीं चलने देने के ध्येय को चरितार्थ करते हुए डॉ. चपलोत ने अपने राष्ट्र सर्वोपरि माना है। डॉ. चपलोत जैन समाज के सत्य-अहिंसा-अपरिग्रह के सिद्धांत की जीती जागती प्रतिमूर्ति है। समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिये डॉ. चपलोत को हाल ही में जैन सोश्यल ग्रुप मेवाड़ रिजन के संस्थापक अध्यक्ष बनाये गये,जो इस मेवाड़ के लिये गौरव की बात है।

जीतो संगठन के मुख्य सचिव सीए डॉ.महावीर चपलोत अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए समाज सेवा एवं प्राफेशन में अग्रणी रहते हुए चार्टर्ड एसोसिएशन के युवा अध्यक्ष बनते हुए प्रोफेशन के सहयोगियों के लिये अनेक कार्य किये। सीए महावीर चपलोत ने समाज सेवा में भी काम करते हुए उदयपुर, राजसमन्द एवं चित्तौड़ में वन्देमातरम् कार्यक्रम विशाल आयोजन जनमानस पर एक अमिट छाप छोड़ी। समाज सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो के लिये महावीर चपलोत को गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जा चुका है। ये ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने नेशनल बार अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

डॉ ओे.पी.चपलोत की पुत्रवधु सीए मीनू चपलोत भी अपनी ओपी एस.चपलोत एण्ड कंपनी में भागीदार के रूप में अपनीे सेवायें दे रही है। मीनू चपलोत कई संस्थाओं से जुड़ी हुई है। सीए मीनू वर्तमान में जीतो उदयपुर क्वीन्स चेप्टर की उपाध्यक्ष हैै। इससे पूर्व वे सीए एसोसिएशन की कार्यकारिणी में सदस्य रह चुकी है।

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