क्या बिना अनुमति लिए सरकार ले सकती है आपकी जमीन ? जाने नोटिस और मुआवजे के नियम

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क्या बिना अनुमति लिए सरकार ले सकती है आपकी जमीन ? जाने नोटिस और मुआवजे के नियम 

Udaipur Times, New Delhi : अगर आपकी जमीन किसी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए चाहिए और आप उसे बेचने के लिए तैयार नहीं हैं, तो अधिकारी आपको जबरन सेल डीड साइन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में जमीन मालिकों के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि स्वैच्छिक बिक्री और सरकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।

क्या है जमीन मालिक की सहमति जरूरी?

कोर्ट ने कहा कि अगर जमीन मालिक अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार है और कीमत को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बनती है, तभी आपसी सहमति से सेल डीड के जरिए जमीन खरीदी जा सकती है। लेकिन अगर मालिक जमीन बेचने से इनकार करता है या सरकार की तय कीमत से सहमत नहीं है, तो उस पर बिक्री के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का दबाव नहीं बनाया जा सकता।

ऐसी स्थिति में सरकार को जमीन लेने के लिए कानून में तय भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनानी होगी और पात्र जमीन मालिकों को नियमों के अनुसार मुआवजा देना होगा।

सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा था मामला

यह मामला बलरामपुर जिले के देवीपाटन तुलसीपुर गांव में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन लेने से जुड़ा था। अखिलेश कुमार पंकज समेत आठ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि अधिकारी उनकी जमीन लेने के लिए दबाव बना रहे हैं और उन्हें प्रस्तावित कीमत भी मंजूर नहीं है।

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में जमीन पहले ही सेल डीड के जरिए खरीदी जा चुकी है। करीब 80 फीसदी जमीन खरीदी जा चुकी थी और अलग-अलग जमीन मालिकों के 104 रजिस्ट्रेशन भी हो चुके थे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने अपनी जमीन के मामले में सहमति नहीं दी थी।

स्वैच्छिक बिक्री और अधिग्रहण में जाने क्या है फर्क?

अगर कोई जमीन मालिक अपनी इच्छा से जमीन बेचने के लिए तैयार है, तो सरकार और मालिक आपसी सहमति से कीमत तय करके सेल डीड करा सकते हैं। यह स्वैच्छिक बिक्री का मामला होगा।

वहीं, अगर जमीन मालिक जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं है, तो केवल सरकारी परियोजना का हवाला देकर उसे बिक्री के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में सरकार को 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

नोटिस और मुआवजे के नियम  होंगे लागू

कोर्ट के मुताबिक, जब जमीन स्वैच्छिक सहमति से नहीं खरीदी जा रही हो और सरकार उसे अधिग्रहित करना चाहती हो, तो कानून के तहत जरूरी नोटिस और अन्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। पात्र जमीन मालिकों को नियमों के अनुसार मुआवजा भी देना होगा।

यानी सरकार को जमीन किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए चाहिए होने मात्र से जमीन मालिक को जबरन सेल डीड साइन कराने का अधिकार नहीं मिल जाता।

फैसले से जमीन मालिकों को मिली राहत

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को परेशान न करें और उन पर सेल डीड साइन करने का दबाव न बनाएं। अगर जमीन मालिक अपनी इच्छा से जमीन बेचने के लिए तैयार होते हैं, तो कानून के मुताबिक आपसी सहमति से बिक्री की जा सकती है।

इसलिए अगर आप अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं हैं, तो सरकारी अधिकारी आपको केवल दबाव बनाकर सेल डीड साइन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में सरकार को भूमि अधिग्रहण के लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी और नियमों के अनुसार मुआवजा देना होगा।

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