क्या आपको भी नहीं मिल रहे पुश्तैनी जमीन के कागजात, ऐसे पता लगाएं कहां है जमीन ?

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क्या आपको भी नहीं मिल रहे पुश्तैनी जमीन के कागजात, ऐसे पता लगाएं कहां है जमीन ?

Udaipur Times , Property Document : अगर आपको भी जमीन-जायदाद से जुड़े कागज को लेकर कोई मुश्किल है तो ये खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। जैसे की कई परिवारों में जमीन-जायदाद से जुड़े कागज कई साल पुराने होते हैं। कभी दादा के नाम जमीन रही, कभी परदादा के नाम। समय के साथ कागज खराब हो गए या कहीं रखे-रखे खो गए तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि जमीन का रिकॉर्ड दोबारा कहां से मिलेगा? जानकारी के लिए आपकों बता दें की अब कई राज्यों में जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकता है। इसके लिए हर बार तहसील या सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। आप घर बैठे अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जमीन की जानकारी चेक कर सकते हैं।

जमीन का रिकॉर्ड देखने के लिए मोबाइल या कंप्यूटर में क्रोम खोलें। गूगल पर अपने राज्य का नाम लिखकर उसके साथ भूलेख, लैंड रिकॉर्ड्स या रेवेन्यू डिपार्टमेंट सर्च करें। जैसे की, अगर जमीन बिहार में है तो बिहार का आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड पोर्टल देखें। इसी तरह उत्तर प्रदेश की जमीन के लिए यूपी के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जाना होगा। वेबसाइट खुलने के बाद वहां आपको जमीन का रिकॉर्ड देखने से जुड़ा विकल्प मिलेगा।


अब आपको जमीन की लोकेशन से जुड़ी जानकारी चुननी होगी। सबसे पहले जिला चुनें। इसके बाद तहसील या अंचल और फिर गांव का नाम चुनना होगा। यहां एक बात का खास ध्यान रखें। जिला, तहसील और गांव बिल्कुल सही चुनें। अगर इनमें गलती हुई तो आपके सामने किसी दूसरी जगह की जमीन का रिकॉर्ड आ सकता है।


जानकारी के अनुसार, अब जमीन का रिकॉर्ड खोजने के लिए अलग-अलग विकल्प मिल सकते हैं। कई पोर्टल पर खातेदार के नाम, खसरा नंबर, खाता नंबर या खतौनी नंबर से रिकॉर्ड खोजने की सुविधा होती है। अगर आपके पास खसरा या खाता नंबर नहीं है तो खातेदार के नाम से रिकॉर्ड खोजना आसान हो सकता है।

जिस दादा या परदादा के नाम जमीन रही होगी, उनका नाम डालकर सर्च करें। नाम की स्पेलिंग या पुराने रिकॉर्ड में दर्ज नाम अलग होने पर रिकॉर्ड नहीं भी मिल सकता है. ऐसी स्थिति में नाम के दूसरे तरीके से खोजने की कोशिश करें।

रिकॉर्ड सामने आए तो जानकारी ध्यान से मिलाएं
जैसा की नाम से सर्च करने पर एक जैसे या मिलते-जुलते नाम वाले कई रिकॉर्ड सामने आ सकते हैं। इसलिए सिर्फ नाम देखकर किसी रिकॉर्ड को अपनी जमीन न मान लें। रिकॉर्ड में दिए गए खाता नंबर, खसरा नंबर, जमीन का रकबा, गांव और खातेदार का नाम ध्यान से मिलाएं। सही रिकॉर्ड मिलने पर पोर्टल पर उपलब्ध विकल्प के जरिए खतौनी, जमाबंदी या जमीन के रिकॉर्ड की नकल देखी जा सकती है। कुछ राज्यों में इसे डाउनलोड या प्रिंट करने की सुविधा भी मिलती है।

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