कृष्ण के द्वारिका आगमन पर पर मनाया उत्सव
उदयपुर। कथा वाचक संत कुंजबिहारी दास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर के युद्ध के पश्चात जब द्वारिका आयें और द्वारकावासियों को जब मालूम हुआ कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उनके आगमन पर पूरी द्वारिका में उत्सव मनाया।
वे आज हिरणमगरी से. 4 स्थित महेश सेवा समिति में चल रही 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ‘गगोत्सव‘ के तीसरे दिन बोल रहे थे। द्वारिका आने पर श्रीकृष्ण सीधे अपने माता-पिता के महल गये और उनके चरणों में प्रणाम किया। यहाँ पर उन्होंने यह शिक्षा दी कि सबसे पहले माता-पिता बाकि सभी बाद में। प्रातः उठते ही माता-पिता का चरण वंदन करें।
उन्होंने कहा कि भागवत श्रवण भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति करने वाला क्षण होता है। उन्होंने चतुःश्लोकी भावगत, वराह अवतार, कपिलोपाख्यान, सती चरित्र, धु्रव चरित्र पर कथा का वाचन किया।
उन्होंने भगवान राम, युघिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव, इक्ष्वाकु आदि के चरित्र का वर्णन किया। राजा परीक्षित के जीवन से जुड़ी कथा का वाचन किया। राजा परीक्षित ने माता के ह्दय में किसी पुरूष का दर्शन किया था। युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण का अश्वमेघ यज्ञ किया था।