जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियमों में हुआ बदलाव, यदि समय पर नहीं किया आवेदन तो काटने पड़ सकते हैं कोर्ट के चक्कर
Udaipur Times, New rules for birth and death registration : बच्चे के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र और किसी की मृत्यु पर मृत्यु प्रमाण पत्र लेना ज़रूरी है। दोनों ही दस्तावेज़ बहुत महत्वपूर्ण हैं। जन्म प्रमाण पत्र बच्चे की पहचान का पहला दस्तावेज़ होता है, जो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और स्कूल में दाखिले के लिए ज़रूरी है। इसी तरह, परिवार के सदस्यों के लिए बैंकिंग से जुड़े काम करने या मालिकाना हक साबित करने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र ज़रूरी है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में अब बदलाव होने जा रहा है;
नए नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू
हाल ही में संसद ने 'जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन (संशोधन) बिल, 2026' पास किया है और राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद यह 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गया है। मूल 'जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1969' में संशोधन किए गए हैं, जिसका मतलब है कि अब इन प्रमाण पत्रों को पाने के लिए नई प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
नए नियम मुख्य रूप से उन लोगों पर असर डालेंगे जो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में देरी करते हैं। इसका मतलब है कि अगर आप तय समय सीमा के बाद जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, तो आपको नए नियमों का पालन करना होगा।
देरी से रजिस्ट्रेशन से जुड़े दो नियम
पहला नियम: अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल के बाद लेकिन दो साल पूरे होने से पहले दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन की अनुमति केवल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही मिलेगी।
ऐसे मामलों में वेरिफिकेशन और तय फीस का भुगतान भी करना होगा
दूसरा नियम: अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल की अवधि के बाद दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन की अनुमति केवल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के आदेश पर ही मिलेगी। इसका मतलब है कि दो साल की देरी के बाद, आपको कोर्ट के ज़रिए वेरिफिकेशन करवाना होगा। सरकार का कहना है कि इस नियम को बदलने का मकसद जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को ज़्यादा सटीक, पारदर्शी और समय पर तैयार करना है।
दूसरा नियम: यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल की अवधि के बाद दी जाती है, तो पंजीकरण केवल 'ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास' के आदेश पर ही किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि दो साल की देरी के बाद, आपको अदालत के माध्यम से सत्यापन (वेरिफिकेशन) करवाना होगा। सरकार का कहना है कि इस नियम को बदलने का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समय पर तैयार करना है।