गरीबों का सस्ता ड्राईफ्रूट ! काजू-बादाम खाने से भी ज्यादा मिलेगा फायदा, बीमारियां रहेगी कोसो दूर

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गरीबों का सस्ता ड्राईफ्रूट ! काजू-बादाम खाने से भी ज्यादा मिलेगा फायदा, बीमारियां रहेगी कोसो दूर 

Udaipur Times, New Delhi : अच्छी सेहत के लिए अक्सर डाइट में ड्राई फ्रूट्स शामिल करने की सलाह दी जाती है। काजू, बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर माने जाते हैं, लेकिन इनकी कीमत अधिक होने के कारण हर व्यक्ति के लिए इन्हें रोजाना खरीदना आसान नहीं होता। ऐसे में कम बजट में मिलने वाली मूंगफली एक पौष्टिक विकल्प हो सकती है।

मूंगफली को कई जगहों पर आम बोलचाल में ‘गरीबों का पिस्ता’ भी कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि यह दूसरे महंगे ड्राई फ्रूट्स की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध हो जाती है और इसमें प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि सीमित बजट में पौष्टिक खानपान रखने वाले लोगों के लिए मूंगफली को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर यह समझना जरूरी है कि वह संतुलित आहार का हिस्सा है, किसी बीमारी का इलाज नहीं। मूंगफली के सेवन की मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

कम कीमत में मिल बेहतर स्वाद और पौष्टिक विकल्प

रायबरेली के सीएचसी शिवगढ़ की आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एमडी आयुर्वेद) के अनुसार, जो लोग कम कीमत में ड्राई फ्रूट्स का विकल्प तलाश रहे हैं, वे अपनी डाइट में मूंगफली को शामिल कर सकते हैं। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, कैल्शियम, विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।

मूंगफली को बाजार से आसानी से खरीदा जा सकता है और इसे खाने के भी कई तरीके हैं। इसे भूनकर, भिगोकर या अलग-अलग व्यंजनों में शामिल करके खाया जा सकता है। हालांकि, इसका सेवन करते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। डॉक्टर के मुताबिक मूंगफली को किसी बीमारी के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य के लिए इसे संतुलित और विविध आहार के एक हिस्से के रूप में ही शामिल करना उचित है।

प्रोटीन और फाइबर का स्रोत है मूंगफली

मूंगफली में प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा मूंगफली में हेल्दी फैट और कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।यही वजह है कि बहुत से लोग इसे नाश्ते या हल्के भोजन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, मूंगफली में कैलोरी भी पर्याप्त मात्रा में होती है, इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा खाना उचित नहीं माना जाता।

अगर कोई व्यक्ति अपनी डाइट में मूंगफली शामिल करता है तो उसे अपनी कुल डाइट, उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।

सर्दियों में ही नहीं, दूसरे मौसम में भी खा सकते हैं बिना किसी नुकसान

आमतौर पर सर्दियों के मौसम में लोग भुनी हुई मूंगफली खाना अधिक पसंद करते हैं। ठंड के दिनों में बाजारों में भी मूंगफली की मांग बढ़ जाती है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इसे केवल सर्दियों में ही खाया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में इसे दूसरे मौसम में भी सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है।डॉ. आकांक्षा दीक्षित के अनुसार, मूंगफली को रातभर पानी में भिगोकर सुबह भी खाया जा सकता है। इसके अलावा भुनी हुई मूंगफली, मूंगफली की चटनी, लड्डू और कई तरह के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

इस तरह रोजमर्रा के भोजन में स्वाद और पोषण दोनों को ध्यान में रखते हुए मूंगफली को अलग-अलग तरीके से शामिल किया जा सकता है।

मूंगफली से बनाए जा सकते हैं कई बहरीन व्यंजन

मूंगफली की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह है कि इसे सिर्फ एक तरीके से खाने की जरूरत नहीं होती। इसे भूनकर सीधे खाया जा सकता है। इसके अलावा इससे चटनी तैयार की जा सकती है और कई पारंपरिक व्यंजनों में भी इसका इस्तेमाल होता है। कई घरों में मूंगफली से लड्डू और अन्य स्नैक्स भी बनाए जाते हैं। कुछ लोग इसे सलाद या दूसरे खाद्य पदार्थों में मिलाकर भी खाते हैं। इस वजह से बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक इसे अपनी पसंद के अनुसार डाइट में शामिल कर सकते हैं।

हालांकि, अगर इसमें बहुत ज्यादा नमक, चीनी या तेल मिलाकर खाया जाए तो भोजन की कुल कैलोरी और सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए संभव हो तो कम नमक और कम तेल वाले विकल्प को प्राथमिकता देना बेहतर है।

किन लोगों को मूंगफली खाने से बचना चाहिए?

मूंगफली पौष्टिक जरूर है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। जिन लोगों को मूंगफली से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। मूंगफली की एलर्जी कुछ लोगों में गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है।

एलर्जी की स्थिति में त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए जिन लोगों को पहले से मूंगफली या इससे जुड़े खाद्य पदार्थों से एलर्जी की जानकारी है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

बीमारी या दवाएं लेने वालों को रखना चाहिए खास  ध्यान

अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से जूझ रहा है या नियमित रूप से दवाओं का सेवन करता है तो उसे अपनी डाइट में किसी खाद्य पदार्थ की मात्रा अचानक बढ़ाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।

खासकर ऐसे लोगों को अपनी पूरी डाइट को ध्यान में रखकर भोजन का चुनाव करना चाहिए। केवल मूंगफली या किसी एक खाद्य पदार्थ को स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त मानना सही नहीं है। शरीर को अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो विविध और संतुलित आहार से पूरी होती है।

महंगे ड्राई फ्रूट्स का विकल्प, लेकिन तुलना समझना जरूरी

काजू, बादाम और पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स की तुलना में मूंगफली आमतौर पर कम कीमत में उपलब्ध हो जाती है। इसलिए सीमित बजट वाले परिवारों के लिए यह आसानी से मिलने वाला पौष्टिक विकल्प बन सकती है। 

इसमें प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे कई बार ‘गरीबों का पिस्ता’ कहा जाता है। हालांकि, मूंगफली को काजू, बादाम या पिस्ता का बिल्कुल समान विकल्प मानना जरूरी नहीं है, क्योंकि अलग-अलग खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की मात्रा और संरचना अलग होती है।

इसलिए बेहतर तरीका यह है कि बजट और उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग पौष्टिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल किया जाए।

कितनी मात्रा में खाना चाहिए मूंगफली?

मूंगफली पौष्टिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे असीमित मात्रा में खाया जाए। इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी होती है, इसलिए जरूरत से ज्यादा सेवन करने से कुल कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है।

किसी व्यक्ति के लिए सही मात्रा उसकी उम्र, स्वास्थ्य, शारीरिक गतिविधि और पूरी डाइट पर निर्भर करती है। इसलिए किसी एक निश्चित मात्रा को हर व्यक्ति के लिए सही मानना उचित नहीं होगा।

डाइट में मूंगफली शामिल करते समय कम नमक, कम तेल और संतुलित मात्रा का ध्यान रखना बेहतर है।

सिर्फ मूंगफली अन्य विकल्पों को भी रखे ध्यान 

विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी सेहत के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में विविधता रखना जरूरी है। डाइट में दालें, साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दूध या उसके विकल्प, बीज, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को जरूरत के अनुसार शामिल किया जा सकता है।

मूंगफली सीमित बजट में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व उपलब्ध कराने वाला एक उपयोगी विकल्प हो सकती है, लेकिन यह संतुलित आहार का केवल एक हिस्सा है। अगर काजू-बादाम जैसे महंगे ड्राई फ्रूट्स रोजाना खरीदना बजट में नहीं है, तो मूंगफली को डाइट में शामिल करना एक किफायती विकल्प हो सकता है। 

इसे भूनकर, भिगोकर या अलग-अलग व्यंजनों के रूप में खाया जा सकता है। हालांकि, एलर्जी वाले लोगों को इससे बचना चाहिए और किसी बीमारी या विशेष डाइट की स्थिति में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर  होगा हल। स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी है कि भोजन संतुलित, विविध और व्यक्ति की जरूरत के मुताबिक हो।

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