छत पर बिना सोलर पैनल लगाए भी मिलेगी सस्ती बिजली ! जानिए क्या है नई टेक्नोलॉजी ?
Udaipur Times, Community Solar System : अगर आपके घर की छत नहीं है, आप किराए के मकान में रहते हैं या सोलर पैनल लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च नहीं कर सकते, तो कम्युनिटी सोलर टेक्नोलॉजी (Community Solar System) आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। इस मॉडल में आपको अपने घर पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत नहीं होती, फिर भी आप सौर ऊर्जा का लाभ उठाकर बिजली का बिल कम कर सकते हैं।
कम्युनिटी सोलर में किसी बड़े स्थान पर एक सोलर पावर प्लांट लगाया जाता है। लोग उस प्लांट में हिस्सेदारी खरीदते हैं या मासिक सब्सक्रिप्शन लेते हैं। प्लांट से बनने वाली बिजली सीधे बिजली ग्रिड में जाती है और उपभोक्ता के हिस्से के अनुसार बिजली बिल में क्रेडिट दिया जाता है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
कम्युनिटी सोलर (Community Solar System) का पूरा सिस्टम चार चरणों में काम करता है।
सबसे पहले किसी खुले और धूप वाले स्थान पर एक बड़ा सोलर प्लांट लगाया जाता है।
इसके बाद इच्छुक उपभोक्ता उस प्लांट में हिस्सेदारी खरीदते हैं या मासिक सदस्यता लेते हैं।
प्लांट से बनने वाली बिजली सीधे स्थानीय बिजली ग्रिड में भेजी जाती है।
बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) उपभोक्ता के हिस्से के अनुसार सोलर क्रेडिट उसके बिजली बिल में समायोजित कर देती है, जिससे हर महीने का बिल कम हो जाता है।
भारत में कहां उपलब्ध है यह सुविधा?
भारत में कम्युनिटी सोलर अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन कई राज्यों में इसे लागू किया जा चुका है। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में वर्चुअल नेट मीटरिंग (Virtual Net Metering) और ग्रुप नेट मीटरिंग (Group Net Metering) की व्यवस्था लागू है।
दिल्ली में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या हाउसिंग सोसायटी सामूहिक रूप से सोलर प्लांट लगाकर उसके लाभ को अलग-अलग फ्लैटों में रहने वाले लोगों के बिजली बिल में बांट सकती है। फिलहाल यह मॉडल मुख्य रूप से बड़े शहरों, अपार्टमेंट, हाउसिंग सोसायटी और कुछ व्यावसायिक परिसरों में इस्तेमाल हो रहा है।
कितना आता है खर्च?
कम्युनिटी सोलर (Community Solar System) का लाभ दो तरीकों से लिया जा सकता है।
पहला, आप सोलर प्लांट में अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा खरीद सकते हैं। अनुमान के मुताबिक 1 किलोवाट क्षमता का हिस्सा खरीदने पर लगभग 40,000 से 60,000 रुपये तक खर्च आता है। इसके बाद लगभग 25 वर्षों तक उस हिस्से से बनने वाली बिजली का क्रेडिट आपके बिल में मिलता रहता है।
दूसरा विकल्प सब्सक्रिप्शन मॉडल है। इसमें शुरुआती शुल्क देकर मासिक प्लान लिया जा सकता है। ऐसे प्लान सामान्य बिजली दरों की तुलना में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक सस्ते हो सकते हैं।
रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar) और कम्युनिटी सोलर (Community Solar System) में क्या अंतर है?
रूफटॉप सोलर में अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने पड़ते हैं। इसकी शुरुआती लागत अधिक होती है और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उपभोक्ता की होती है।
वहीं कम्युनिटी सोलर में न तो अपनी छत की जरूरत होती है और न ही रखरखाव की चिंता। पूरा संचालन डेवलपर या संबंधित संस्था करती है। यह मॉडल खासतौर पर किरायेदारों, अपार्टमेंट में रहने वालों, छोटे व्यवसायों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए उपयोगी है।
किसके लिए बेहतर है यह तकनीक?
यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, अपार्टमेंट में रहते हैं, आपके पास सोलर पैनल लगाने की जगह नहीं है या शुरुआती बड़ा निवेश नहीं करना चाहते, तो कम्युनिटी सोलर बेहतर विकल्प हो सकता है।
वहीं, यदि आपका खुद का मकान है और आप एकमुश्त निवेश कर सकते हैं, तो पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर रूफटॉप सोलर लगाना अधिक फायदेमंद हो सकता है। इससे बिजली बिल लगभग पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
