बचपन का सपना बना हकीकत, 23 साल में UPSC और 30 साल में बनीं सबसे युवा DM

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बचपन का सपना बना हकीकत, 23 साल में UPSC और 30 साल में बनीं सबसे युवा DM 

Udaipur Times, IAS Apoorva Pandey : उत्तराखंड की बागेश्वर जिला कलेक्टर अपूर्वा पांडे इन दिनों चर्चा में हैं। महज 33 वर्ष की उम्र में वह उत्तराखंड की सबसे युवा जिला कलेक्टर (डीएम) बन गई हैं। 23 साल की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 39 हासिल करने वाली अपूर्वा की सफलता की कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

बचपन से ही पढ़ाई में थीं अव्वल

अपूर्वा पांडे का जन्म 29 अप्रैल 1994 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ। परिवार में उन्हें प्यार से "मन्नू" कहा जाता है। उनकी मां मीना पांडे नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC) में रसायन विज्ञान की शिक्षिका हैं, जबकि पिता किशन चंद्र पांडे कोटाबाग पॉलिटेक्निक में अध्यापक रहे हैं।

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट मैरी स्कूल से की और इंटरमीडिएट की शिक्षा हल्द्वानी के बिरला शिवा सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। इसके बाद गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।

बचपन का सपना बना हकीकत

दूसरे प्रयास में मिली UPSC में सफलता

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपूर्वा ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने 2017 की UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 39 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जगह बनाई। महज 23 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक पास कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

कई अहम प्रशासनिक पदों पर कर चुकी हैं काम

आईएएस बनने के बाद अपूर्वा पांडे ने उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह पौड़ी गढ़वाल में मुख्य विकास अधिकारी (CDO), अपर सचिव (पेयजल एवं गृह विभाग), निदेशक (स्वजल) के पद पर कार्य कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने देहरादून, रुड़की और रानीखेत में भी विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं।

वर्तमान में वह बागेश्वर जिले की जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं और उत्तराखंड की सबसे युवा डीएम हैं।

बागेश्वर में संभालते ही तय कीं प्राथमिकताएं

बागेश्वर का कार्यभार संभालने के बाद अपूर्वा पांडे ने मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते राहत कार्य किए जा सकें।

इसके अलावा उन्होंने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में अतिक्रमण व अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई, तहसील दिवस और जनता दरबार के माध्यम से लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

बचपन का सपना बना हकीकत

किताबें और वाद-विवाद रहे सफलता का आधार

अपूर्वा पांडे बचपन से ही किताबें पढ़ने और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेने की शौकीन रही हैं। उन्होंने कई डिबेट प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी जीते। उनका मानना है कि नियमित अध्ययन और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता ने उन्हें UPSC की तैयारी में काफी मदद की।

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

अपूर्वा पांडे की कहानी बताती है कि लगातार मेहनत, धैर्य और सही रणनीति से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर उत्तराखंड की सबसे युवा जिला कलेक्टर बनने तक का उनका सफर आज लाखों UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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