बच्चे, माता पिता के पैर छू कर खुशी से आते है ‘‘खुशी‘‘ केन्द्र
राजसमंद के कीरो का ओड़ा ‘‘खुशी‘‘ केन्द्र में अब बच्चों की 85 प्रतिशत उपस्थिति रहती है जो कि पूर्व में 40-50 प्रतिशत ही थी वह भी सिर्फ पोषाहार के समय । अब यहां के ‘‘खुशी‘‘ केन्द्र में आने से पहले घर से बच्चे माता पिता के पैर छू कर आत
राजसमंद के कीरो का ओड़ा ‘‘खुशी‘‘ केन्द्र में अब बच्चों की 85 प्रतिशत उपस्थिति रहती है जो कि पूर्व में 40-50 प्रतिशत ही थी वह भी सिर्फ पोषाहार के समय । अब यहां के ‘‘खुशी‘‘ केन्द्र में आने से पहले घर से बच्चे माता पिता के पैर छू कर आते है और केन्द्र पर भी मौजूद सभी बड़ो के पैर छूते है।

इस आंगनवाडी केन्द्र के बच्चों का पूरा समय, केन्द्र पर ठहराव है। नियमित तौर पर केन्द्र के बच्चों का टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच होती है एवं हाल ही में हुई जांच में सभी बच्चे स्वस्थ एवं सुपोषित पाये गये। हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा खुशी परियोजना के प्रारंभ से पूर्व केन्द्र पर बच्चों का ठहराव करवाना चुनौती पूर्ण था। ‘‘खुशी‘‘ खिलौना बैंक, शिक्षा बैंक, पोषाहार के लिये बर्तन, दरी पट्टी, सेनिटेशन किट हिन्दुस्तान जिंक के द्वारा उपलब्ध कराए गये है जिसके बाद बच्चों का मन आगंनवाडी केन्द्र पर रमने लगा है। इस केन्द्र के बच्चे साफ सुथरे घर से आते है वहीं केन्द्र में भी अपने हाथ पैर धो कर प्रवेश करते है।

इस केन्द्र में हिन्दुस्तान जि़ंक के सहयोग के बाद समुदाय का जुडाव भी बढ़ा है। भामाशाहों द्वारा केन्द्र के बच्चों को प्रति माह में एक बार दूध उपलब्ध कराया जा रहा है तो वही कुछ बच्चों के लिये ड्रेस भी उपलब्ध कराइ गयी है। हिन्दुस्तान जिं़क एवं जतन द्वारा आशा सहयोगिनी को ट्रेनिंग व कार्यशाला के माध्यम से और अधिक रूचिकर तरिके से बच्चों को खेल खेल में अक्षर ज्ञान व सामान्य जानकारी दी जा रही है। सरकारी पोषाहार को नियमित तौर पर सहयोगिनी और कार्यकर्ता द्वारा दिया जा रहा है। महिला एवं बालविकास विभाग द्वारा हाल ही में इन्हें शालापूर्व शिक्षा हेतु रोचक ज्ञानवर्धक किताबें दी गयी है।