पिता की हर संपत्ति पर नहीं होता बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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पिता की हर संपत्ति पर नहीं होता बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला 

Udaipur Times, Property News : परिवारों में संपत्ति को लेकर विवाद अक्सर सामने आते रहते हैं। कई लोगों का मानना है कि जन्म लेते ही उन्हें पिता की संपत्ति में हिस्सा मिल जाता है, लेकिन कानूनी रूप से यह हर मामले में सही नहीं है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि बच्चों को हर स्थिति में पिता की संपत्ति पर जन्मसिद्ध अधिकार नहीं मिलता।

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला एक बेटी से जुड़ा था, जिसने अपने पिता को दादा से मिली संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की। बेटी का दावा था कि उसे जन्म के आधार पर इस संपत्ति में अधिकार है। हालांकि, अदालत ने पाया कि संबंधित संपत्ति दादा ने अपनी स्वयं की कमाई से खरीदी थी। बाद में यह संपत्ति पिता के नाम जरूर हुई, लेकिन इससे उसकी कानूनी प्रकृति नहीं बदली। इसलिए अदालत ने माना कि बेटी इस संपत्ति पर जन्मसिद्ध अधिकार का दावा नहीं कर सकती।

कब नहीं मिलता जन्मसिद्ध अधिकार?

हाईकोर्ट के अनुसार, निम्न परिस्थितियों में बच्चों को जन्म के आधार पर संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता-

यदि संपत्ति पिता या दादा ने अपनी कमाई से खरीदी हो।

केवल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को संपत्ति मिलने भर से वह पैतृक संपत्ति नहीं बन जाती।

ऐसी संपत्ति पर बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता।

किन मामलों में संपत्ति पैतृक नहीं मानी जाती?

अदालत के अनुसार, निम्न प्रकार से प्राप्त संपत्ति पैतृक संपत्ति की श्रेणी में नहीं आती-

खुद की कमाई से खरीदी गई संपत्ति।

उपहार (Gift) में मिली संपत्ति।

वसीयत (Will) के माध्यम से प्राप्त संपत्ति।

पारिवारिक समझौते (Family Settlement) से मिली संपत्ति।

बंटवारे (Partition) में किसी व्यक्ति के हिस्से में आई व्यक्तिगत संपत्ति।

ऐसे मामलों में बच्चों को केवल जन्म के आधार पर संपत्ति में हिस्सेदारी का अधिकार नहीं मिलता।

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