खादी मेले का समापन
उदयपुर शहर के मध्य स्थित टाउन हाल प्रांगण में चल रहे 18 दिवसीय राज्य स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का आयोजन 8 दिसम्बर 2012 को शुरू हुआ जिसका समापन आज सफलता पूर्वक हुआ।
उदयपुर शहर के मध्य स्थित टाउन हाल प्रांगण में चल रहे 18 दिवसीय राज्य स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का आयोजन 8 दिसम्बर 2012 को शुरू हुआ जिसका समापन आज सफलता पूर्वक हुआ।
प्रदर्शनी में इस बार 131 अस्थाई स्टालों का निर्माण किया गया। प्रदर्शनी में प्रदेश स्तर की 28 खादी संस्था समितियों द्वारा भाग लिया गया जिसमें 61 स्टाले आवंटित हुई पी.एम.ई.जी.पी ईकाइयों को 67 स्टाले आवंटित की गई। इस प्रकार से प्रदेश के 16 जिलो से विभिन्न इकाई द्वारा भाग लिया गया।
प्रदर्शनी में इस बार प्रतिदिन 22 से 25 हजार दर्शको द्वारा प्रदर्शनी किया गया। इस प्रकार प्रदर्शनी में विशिष्ट व्यक्तियों, जन प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद के द्वारा समय समय पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
प्रदर्शनी में इस बार मुख्य आकर्षण सुती खादी, ऊनी खादी, रेशम खादी, आचार मुरबा, आयुर्वेद उत्पाद, लाख से बने सामान, चुडियां, प्लास्टिक उत्पाद, स्टील एवं लकड़ी के फर्नीचर, तिल्ली के द्वारा बनाये गये व्यंजन व तेल, हर्बल आइटम आदि रहे।
इस समबन्ध में हुई प्रेस वार्ता में अध्यक्षता महेन्द्र प्रताप वया ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी उदयपुरवासियों में वही उत्सुकता दिखाई दी खादी मेले के प्रति और इस बार मेले में कई तरह के नयी वस्तुए आई है जो लोगों को बहुत पसंद आ रही है। उन्होंने कहा कि लोगों के लिए मेले में पहले दिन से ही यहाँ हर तरह की सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गई जिससे किसी को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि 18 दिन चले इस खादी प्रदर्शनी में हर साल से ज्यादा इस बार करीब 1 करोर से भी ज्यादा की बिक्री हुई है।
व्यवसायी चन्द्र प्रकाश पालीवाल का कहना है कि वह खादी मेले में 10 सालो से दुकान लगा रहे है जिसमें सभी प्रकार के खादी वस्तुए उपलब्ध है और यहाँ के लोगो के लिए हर बार कुछ नया लेकर आते है। उन्होंने कहा कि इस बार युवाओ में खादी और ऊनी जैकेट को लेकर खाफी दिलचस्पी देखने को मिली। इस बार ज्यादा बिक्री सिल्क की सरिया और हाफ जैकेट में रही और लगभग इन 18 दिनों में करीब 400000 की बिक्री हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरे राजस्थान में अपनी प्रदर्शनी करते है परन्तु उदयपुर के लोगो जितनी प्रतिक्रिया कई और देखने को नहीं मिलती हैं।

