मृत्यु समय के वस्त्र व बिस्तर संक्रमित बायो वेस्ट है, इन्हे झीलों में नही करे विसर्जित
उदयपुर 10 जून 2019, बीमार दिवंगत परिवार जनों के अंतिम वस्त्र, बिस्तर, चद्दरें इत्यादि झीलों में विसर्जित करना एक अपराध है। रविवार को आयोजित झील संवाद में इस प्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। डॉ अनिल मेहता ने कहा कि बीमार व्यक्तियों के मृत्यु के समय पहने हुए कपड़े और निजी वस्त्र झीलों में विसर्जित होने से पीने का पानी संक्रमित हो रहा है। ऐसे अंतिम वस्त्रों, बिस्तर इत्यादि की गठरी बना, बायो वेस्ट लिख, निगम की कचरा वाहिनी में रखना चाहिए।

उदयपुर 10 जून 2019, बीमार दिवंगत परिवार जनों के अंतिम वस्त्र, बिस्तर, चद्दरें इत्यादि झीलों में विसर्जित करना एक अपराध है। रविवार को आयोजित झील संवाद में इस प्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। डॉ अनिल मेहता ने कहा कि बीमार व्यक्तियों के मृत्यु के समय पहने हुए कपड़े और निजी वस्त्र झीलों में विसर्जित होने से पीने का पानी संक्रमित हो रहा है। ऐसे अंतिम वस्त्रों, बिस्तर इत्यादि की गठरी बना, बायो वेस्ट लिख, निगम की कचरा वाहिनी में रखना चाहिए।
तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि मृत परिवार जन के वस्त्र झील में डालने से कभी भी दिवंगत आत्मा को शांति नही मिल सकती। धार्मिक दृष्टि से यह गलत है, साथ ही झील पर्यावरण के लिए घातक है। नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि हर जाति समाज को इसे रोकने के लिए आंतरिक तौर पर कड़ी व्यवस्था व नियमावली बनानी चाहिए। सामाजिक जागरूकता से ही ऐसी प्रथाओं को रोका जा सकता है।
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द्रुपद सिंह तथा कुशल रावल ने कहा कि ऐसे कृत्य एक तरह का सामाजिक अपराध है। पर्यावरणीय नियमो के अनुसार भी ये गलत है। इस अवसर पर आयोजित श्रमदान में रामलाल गहलोत, द्रुपद सिंह कुशल रावल, कृष्णा, दिगम्बर सिंह, तेज शंकर पालीवाल, नंदकिशोर शर्मा, अनिल मेहता इत्यादि ने भाग लिया।
