लोकानुरंजन मेले में जमा लोकनृत्यों का रंग

लोकानुरंजन मेले में जमा लोकनृत्यों का रंग

संस्था के निदेशक डाॅ. लईक हुसैन ने बताया कि कार्यकम की प्रस्तुतियों में बाड़मेर का लंगा दल, जोधपुर का कालबेलिया, बारा का सहरिया आदिवासीयों का स्वांग, बालोतरा का लाल आंगी गैर, हरियाणा का धमाल, उत्तराखण्ड का वीर नृत्य, तेलंगाना का वोगू डोलू एवं गुसाड़ी, मथुरा का मयूर नृत्य, गोवा का ‘‘वीर भद्र एवं मध्यप्रदेश का बधाई लोक नृत्य, महाराष्ट्र की लावणी आदि लोक नृत्यों की प्रस्तुति हुई जिसे लागों ने बहुत पसंद किया।

 

लोकानुरंजन मेले  में जमा लोकनृत्यों का रंग

भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर के 68वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित लोकानुरंजन मेले में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने रंगारग प्रस्तुतियाॅं दी एवं शिल्प मेले का शुभारंभ हुआ।

संस्था के निदेशक डाॅ. लईक हुसैन ने बताया कि वर्ष 1952 में स्व. पद्मश्री देवीलाल सामर द्वारा स्थापित भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर के 68 वें स्थापना दिवस पर आज दिनांक 22 फरवरी से 24 फरवरी 2019 तक ‘‘लोकानुरंजन मेला’’ , दिनांक 25 फरवरी से 2 मार्च तक दि परफोरमर्स, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘15 वें पद्मश्री देवीलाल सामर स्मृति राष्ट्रीय नाट्य समारोह’’ एवं दिनांक 22 फरवरी से 2 मार्च शिल्प मेले का आयोजन भी होगा।

उन्होने बताया कि कार्यक्रम के आरम्भ में संस्था के निदेशक, डाॅ.लईक हुसैन व उपाध्यक्ष, रियाज तहसीन ने मुख्य अतिथि चन्द्र सिंह कोठारी, मेयर (महापौर) उदयपुर व गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया एवं संस्थापक पद्मश्री देवीलालजी सामर सा. की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।

संस्था के निदेशक डाॅ. लईक हुसैन ने बताया कि कार्यकम की प्रस्तुतियों में बाड़मेर का लंगा दल, जोधपुर का कालबेलिया, बारा का सहरिया आदिवासीयों का स्वांग, बालोतरा का लाल आंगी गैर, हरियाणा का धमाल, उत्तराखण्ड का वीर नृत्य, तेलंगाना का वोगू डोलू एवं गुसाड़ी, मथुरा का मयूर नृत्य, गोवा का ‘‘वीर भद्र एवं मध्यप्रदेश का बधाई लोक नृत्य, महाराष्ट्र की लावणी आदि लोक नृत्यों की प्रस्तुति हुई जिसे लागों ने बहुत पसंद किया।

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संस्था परिसर में दिनांक 22 से 02 मार्च तक आयोजित होने वाले शिल्प मेले में आजमगढ़ की बनारसी साड़ी, कोटा की कोटा डोरिया, जयपुर के पत्थरों के आभूषण, आसाम की शिल्प, लकड़ी के खिलौने, प. बगाल के बम्बू और ड्राय फ्लावर, आकोला की ब्लोक प्रिंट, मोलेला कि मिट्टी की कारीगरी (राजसमंद) एवं अन्य प्रांतो से आने वाली शिल्प वस्तुएँ मेले का मुख्य आकर्षण है।

इन सभी राज्यों के साथ भारत सरकार के आदिवासी सहकारी बाज़ार विकास संघ (ट्राईफेड) द्वारा भी इस श्ल्पि मेले में 10 स्टाॅल्स लगाई गयी है जो मेले में आने वाले दर्शको को लुभा रही है। उन्होने यह भी कि बताया कि लोकानुरंजन मेले में दिनांक 23 एवं 24 फरवरी कोे भी रंगारंग प्रस्तुतियाॅं होंगी तथा दिनांक 25 फरवरी से 2 मार्च तक दि परफोरमर्स, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘15 वें पद्मश्री देवीलाल सामर स्मृति राष्ट्रीय नाट्य समारोह’’ में दिनांक 25 फरवरी को सौरभ अनंत द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘हास्यचूड़ामणि, दिनांक 26 फरवरी को चित्रा मोहन द्वारा निर्देशित नाटक‘‘ मच-मच गाड़ी’’, दिनांक 27 फरवरी को प्रिवेन्द्र सिंह द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘शापग्रस्त’’ दिनांक 28 फरवरी को चित्रा मोहन द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘रिफलेक्शन अननोन’’, दिनांक 1 मार्च को अशोक बांठिया निर्देशित नाटक ‘‘कृष्णा’’ तथा दिनांक 02 मार्च को सोनू रोंझिया द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘ डाॅ. आप भी’’ नाटको का मंचन किया जाएगा।

स्थापना दिवस के सभी कार्यक्रम संस्था के मुक्ताकाशी रंगमंच पर सांय 7ः00 बजे से प्रदर्शित किये जाएगें। इसके साथ ही संस्था परिसर में भारत के विभिन्न प्रांतों के शिल्पीयों द्वारा अपने – अपने शिल्प का प्रदर्शन एवं बिक्री की जाएगी। स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाले लोकानुरंजन मेले, 15 वें पद्मश्री देवीलाल स्मृति राष्ट्रीय नाट्य समारोह तथा शिल्प मेले में प्रवेश निःशुल्क रहेगा।

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