पूरी तरह से बिखरा व अलग हुआ क्षतिग्रस्त कान फिर से जोड़ा
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में प्लास्टिक सर्जरी की श्रृंखला में एक और जटिल ऑपरेशन हुआ, लगभग ढाई घंटे चले जटिल ऑपरेशन में प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. आशुतोष सोनी व उनकी टीम ने कुचले, बिखरे व अलग हुए कान को जोडकर पहले जैसा बना दिया।
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में प्लास्टिक सर्जरी की श्रृंखला में एक और जटिल ऑपरेशन हुआ, लगभग ढाई घंटे चले जटिल ऑपरेशन में प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. आशुतोष सोनी व उनकी टीम ने कुचले, बिखरे व अलग हुए कान को जोडकर पहले जैसा बना दिया।
वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशुतोष सोनी ने बताया कि 58 वर्षीय राजसंमद निवासी भीमराज नारूजी का बायां कान कार्यस्थल पर संतुलन बिगड़ने की वजह से मार्बल ढोने की ट्रोली से कटकर लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा अलग हो गया था, पूरी तरह चोटिल, कुचलित व अलग हुए कान को लेकर मरीज के साथी उसे गीतांजली हॉस्पिटल ले आएं। यहां डॉ. आशुतोष सोनी व उनके नर्सिंग स्टाफ में हेमन्त, पुष्कर, विशाल व रवि ने लगभग ढाई घंटे चले ऑपरेशन में मरीज के कुचले हुए व अलग हुए बांयें कान को जोड़ कर पहले जैसा बनाया।
डॉ. सोनी ने बताया कि यह जटिल ऑपरेशन मरीज को बिना बेहोश किए व केवल लोकल एनेस्थिसियां देकर किया गया। इस तरह से विकृत हुए कान को पुनः पहले जेैसा बनाना बहुत कठिन कार्य था, क्योंकि कान पूरी तरह से कुचल कर बिखर गया था। ऑपरेशन में कान के बिखरे हुए टुकड़ों को जोड़कर कान को पूर्व की भांति बनाया गया।
मरीज ने बताया कि सर्वप्रथम कान कटने पर आपातकालीन स्थिति में वह पास के ही निजी हॉस्पिटल गया जहां चिकित्सकों ने कान काटने का बताया, इसे सुनकर वह निराश हो गया। उसके साथी उसे गीतांजली हॉस्पिटल ले आये जहां ऑपरेशन के बाद कान को पहली की तरह बना दिया गया। भीमराज ने बताया कि कान अब सामान्य स्थिति में और इससे कान के भीतर भी कोई समस्या नहीं है। उसने बताया कि अगर कान काटना पड़ता तो वह सुनने की समस्या से जिन्दगी भर पीडि़त रहता और उसका सामान्य जीवन निरस हो जाता, परन्तु अब आम लोगों की भांति ही अपनी जिन्दगी जी पाएगा।
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशुतोष सोनी इस तरह के कई जटिल ऑपरेशन कर चुके है जिसमें मरीजों के विकृत हुए अंगों को पुनः पहले जैसा बनाया गया। इस तरह के जटिल ऑपरेशन गीतांजली हॉस्पिटल में निरन्तर होते रहते है।