
जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ में शोधर्थियों और एसोसिएट प्रोफेसरों के लिए 35 दिवसीय पीएचडी कोर्स वर्क का समापन शनिवार को हुआ। इस दौरान कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, रिसर्च मैथडोलॉजी से जुडी बारीकियां बताई गई।
पीजी डीन प्रो बीएल फडिया ने स्वागत उदृबोधन देते हुए बताया कि इस दौरान कंप्यूटर टेक्नोलॉजी पर आधारित 37 कक्षाएं तथा रिसर्च से जुडी 33 कक्षाओं का अयोजन हुआ। इसमें विषय से जुडे विशेषज्ञों ने जानकारियां दी। समापन समारोह के मुख्य अतिथि धीरूभाई अंबानी आईटी कॉलेज गांधीनगर के प्रो एससी ने बताया कि छात्र अपने शोध का विषय ऐसा चुने जो समाज ओर राष्ट्र को आगे लाने में सहयोगी हो। साथ ही शोध विषयों को गंभीरता से लेते हुए इसमें खोज होनी चाहिए। छात्र कॉपी पेस्ट के कल्चर को बिल्कुल बंद कर दें। शोध के माध्यम से हमारी टेक्नोलॉजी सभ्यता संस्कति को भी बढावा दिया जाना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो एसएस सारंगदेवोत ने कहा कि सभी विभागाध्यक्षों से आहृवान किया कि छा़त्र ऐसे विषय का चयन करें तो हमारी ग्रामीण समस्याओं पर आधारित हो। साथ ही शोध के माध्यम से वहां के निराकरण की संभावनाएं भी विकसित हो। उन्होंने कहा कि रिसर्च वर्क में गहन अध्ययन और फील्ड वर्क की महत्ती आवश्यकता होती है। कुछ समय पूर्व शोध कार्यों में काफी गफलत होती थी, जिसमें काफी हद तक परिवर्तन कर दिया गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ पारस जैन ने किया। धन्यवाद की रस्म समन्वयक डॉ एलआर पटेल ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर सह संयोजक प्रो गिरिशनाथ माथुर, रजिस्टार डॉ प्रकाश शर्मा, डीन डॉ शशि चित्तौडा, डॉ मंजू मांडोत, डॉ मनीष श्रीमाली, डॉ धीरजप्रकाश शर्मा सहित शोधार्थियों ने भी विचार रखे।
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