आर्ट रेजिडेन्सी का समापन, कला मानव और स्रोत से सीधा सम्बन्ध बनाती है: गणनायक

आर्ट रेजिडेन्सी का समापन, कला मानव और स्रोत से सीधा सम्बन्ध बनाती है: गणनायक

प्रसिद्ध मूर्तिकार और नेशनल गैलरी आॅफ माॅडर्न आर्ट के महानिदेशक श्री अद्वैत गणनायक ने कहा कि कला मानव और स्रोत के मध्य सीधा सम्बन्ध स्थापित करती है। श्री गणनायक रविवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित ‘‘कला शिविर-आर्ट इन रेजीडेन्ट’’ के समापन अवसर पर कलाकारों को सम्बोधित कर रहे थे।

 
आर्ट रेजिडेन्सी का समापन, कला मानव और स्रोत से सीधा सम्बन्ध बनाती है: गणनायक

प्रसिद्ध मूर्तिकार और नेशनल गैलरी आॅफ माॅडर्न आर्ट के महानिदेशक श्री अद्वैत गणनायक ने कहा कि कला मानव और स्रोत के मध्य सीधा सम्बन्ध स्थापित करती है। श्री गणनायक रविवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित ‘‘कला शिविर-आर्ट इन रेजीडेन्ट’’ के समापन अवसर पर कलाकारों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पत्थर और उसका सृजन सीधे उस स्रोत से सम्बन्ध स्थापित करता है। बेजान पत्थर शुरू में कुछ अजीब लगता है किन्तु बाद में वह अपना और अपने परिवर सा लगता है और यहीं से सृजन को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित गैलरी में आर्ट अड्डा शुरू करने से कला व कलाकारों पर एक संवाद की शुरुआत हुई है जो प्रेरणास्पद है। शिल्पग्राम में योग पर सृजित मूर्ति शिल्पों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र का यह अनुपम प्रयास है।

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राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष श्री अश्विन दलवी ने इस अवसर पर कहा कि योग को मूर्ति रूप में देख कर अचछा लगा। अकादमी शीघ्र ही युवाओं को ले कर एक कला शिविर का आयोजन करेगी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में एक उचच स्तरीय समिति ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के के कार्शें को देश के कलाकेन्द्रेां में सर्वश्रेष्ठ माना है। केन्द्र निदेशक फुरकान खान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि केन्द्र का निरन्तर यह प्रयास रहा है कि शिल्पग्राम में कुछ नये प्रकल्प किये जाएं। इसी क्रम में योग आधारित कार्यशाला का आयोजन किया।

आर्ट रेजिडेन्सी का समापन, कला मानव और स्रोत से सीधा सम्बन्ध बनाती है: गणनायक

गुजरात के वरिष्ट कलाकार महेन्द्र कड़िया ने केन्द्र के आयोजनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि केन्द्र दृश्य कला में लगातार नये आयाम स्थाापित कर रहा है। वरिष्ठ चित्रकार डाॅ. शैल चोयल ने इस अवसर पर राष्ट्रीय कला केन्द्र की शाखा राजस्थान में प्रारम्भ करने का सुझाव दिया वही श्री कड़िया ने वरिष्ठ कलाकारों पर डाॅक्यूमेन्टरी तैयार करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में कलाकार सुरेश ने अपने अनुभव साझा किये। इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार सुरेश शर्मा व एल.एल. वर्मा भी मौजूद थे। श्री गणनायक ने प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न भेंट किये।

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