सांस्कृतिक प्रदूषण भी रुके
झील क्षेत्र में नशे का व्यापार रोकना जरूरी है। झीलों के किनारे व घाटों पर यह असमाजिक कार्य होना चिंता जनक है। यह विचार झील मित्र संस्थान, झील संरक्षण समिति तथा गांधी मानव कल्याण समिति के तत्वावधान में रविवार को आयोजित श्रमदान संवाद में उभरे। डॉ अनिल मेहता ने कहा कि घाटों व सुनसान किनारों पर प्रायः नशे के इंजेक्शन व पन्नियां इत्यादि पड़े मिलते है। नशेड़ी इन्हें पेयजल की झीलों में भी फेंक देते है।जबकि झीलो का पानी पीने के काम आता है ।झील प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि घाटों पर खुलेआम शराब का सेवन सांस्कृतिक प्रदूषण है। इसको रोकने के लिए सामाजिक व कानूनी प्रयास साथ साथ करने होंगे।
| Feb 5, 2018, 01:13 IST
झील क्षेत्र में नशे का व्यापार रोकना जरूरी है। झीलों के किनारे व घाटों पर यह असमाजिक कार्य होना चिंता जनक है। यह विचार झील मित्र संस्थान, झील संरक्षण समिति तथा गांधी मानव कल्याण समिति के तत्वावधान में रविवार को आयोजित श्रमदान संवाद में उभरे।
डॉ अनिल मेहता ने कहा कि घाटों व सुनसान किनारों पर प्रायः नशे के इंजेक्शन व पन्नियां इत्यादि पड़े मिलते है। नशेड़ी इन्हें पेयजल की झीलों में भी फेंक देते है।जबकि झीलो का पानी पीने के काम आता है ।झील प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि घाटों पर खुलेआम शराब का सेवन सांस्कृतिक प्रदूषण है। इसको रोकने के लिए सामाजिक व कानूनी प्रयास साथ साथ करने होंगे।
गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि झील क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर नशा मुक्ति अभियान चलाना चाहिए। नशे के व्यापार पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए।
संवाद पश्चात झील प्रेमियों ने बारी घाट पर कचरे को हटाया। समीपवर्ती मूत्रालयों से शराब की बोतलें भी हटाई। श्रमदान में मोहनसिंह चौहान, रमेश चंद्र राजपूत, राम लाल गहलोत, हरीश पालीवाल, इमरान खान, विक्की, बंटी, दिगम्बर सिंह, तेज शंकर पालीवाल, नंदकिशोर शर्मा, अनिल मेहता ने भाग लिया।

