पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा, बिना कोचिंग पहले प्रयास में BPSC पास कर बनीं अफसर

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पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा, बिना कोचिंग पहले प्रयास में BPSC पास कर बनीं अफसर 

Udaipur Times, BPSC Success Story Sneha Kumari : 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) की स्नेहा कुमारी की कहानी मेहनत, धैर्य और परिवार के विश्वास की मिसाल है। पहले ही प्रयास में 467वीं रैंक हासिल कर सब इलेक्शन ऑफिसर बनीं स्नेहा ने रिजल्ट आने के बाद सबसे पहले अपने पिता को फोन किया और सिर्फ इतना कहा "पापा, हो गया।"
ये तीन शब्द उस पिता के सालों पुराने सपने के पूरे होने का संकेत थे, जिन्होंने महज 13 साल की उम्र में परिवार की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन हमेशा चाहते थे कि उनके बच्चे ऊंची शिक्षा हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त करें।

पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा

JEE में असफलता के बाद नहीं मानी हार

स्नेहा ने शुरुआती पढ़ाई मोतिहारी के शांतिनिकेतन जुबली स्कूल और 12वीं पटना के कृष्णा निकेतन स्कूल से पूरी की। उनका सपना इंजीनियर बनने का था, लेकिन JEE परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने अपने शहर के एमएस कॉलेज से BBA किया। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने MBA की बजाय सिविल सेवा की तैयारी का रास्ता चुना। वह बताती हैं कि भाई-बहनों के भरोसे और परिवार के समर्थन ने उन्हें दोबारा आत्मविश्वास दिया।

पहले प्रयास में मिली सफलता

साल 2024 में स्नेहा ने पहली बार UPSC और BPSC दोनों परीक्षाएं दीं। UPSC में सफलता नहीं मिली, लेकिन BPSC के पहले ही प्रयास में 467वीं रैंक हासिल कर उन्होंने सब इलेक्शन ऑफिसर का पद प्राप्त कर लिया। उन्होंने किसी बड़े शहर की कोचिंग पर निर्भर होने के बजाय घर से ऑनलाइन और सीमित ऑफलाइन संसाधनों के सहारे तैयारी की।

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तानों का भी करना पड़ा सामना

तैयारी के दौरान उन्हें कई तरह की बातें सुननी पड़ीं घर से तैयारी करके कुछ नहीं होगा। बेटी को इतनी आजादी क्यों दे रहे हो? JEE नहीं निकला, BPSC भी नहीं निकलेगा। हालांकि स्नेहा ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं।

माता-पिता बने सबसे बड़ी ताकत

स्नेहा बताती हैं कि जब भी उनका आत्मविश्वास डगमगाता, उनके पिता उन्हें प्रेरित करते थे। वहीं उनकी मां ने कभी पढ़ाई के दौरान घर के काम का दबाव नहीं डाला और हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

सीमित किताबें, ज्यादा रिवीजन

स्नेहा का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए ढेर सारी किताबें पढ़ना जरूरी नहीं, बल्कि सीमित स्रोतों का बार-बार अध्ययन और उत्तर लेखन का अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत, इतिहास के लिए NCERT और स्पेक्ट्रम, अर्थव्यवस्था के लिए मृणाल सर, भूगोल के लिए NCERT, विज्ञान के लिए लूसेंट और बिहार विशेष के लिए 'बिहार तथ्य संग्रह' का अध्ययन किया। करंट अफेयर्स के लिए नियमित रूप से अंग्रेजी अखबार पढ़े।

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सोशल मीडिया से बनाई दूरी

स्नेहा ने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उन्होंने बताया कि रिजल्ट आने तक उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भी नहीं था। यूट्यूब का इस्तेमाल केवल पढ़ाई और फ्री लेक्चर देखने के लिए करती थीं।

युवाओं को दिया संदेश

स्नेहा का कहना है कि प्रतियोगिता किसी दूसरे से नहीं, बल्कि खुद से होती है। उनका मानना है कि सीमित स्रोत, नियमित रिवीजन, उत्तर लेखन की प्रैक्टिस और निरंतर मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि बड़े शहर, महंगी कोचिंग या अधिक संसाधन ही सफलता की गारंटी नहीं होते। परिवार का भरोसा, स्पष्ट लक्ष्य और लगातार मेहनत से छोटे शहरों के युवा भी बड़े सपने पूरे कर सकते हैं।

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