स्वाधीनता सेनानी महेन्द्र प्रताप बया का निधन

स्वाधीनता आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले वयोवृद्ध स्वाधीनता सेनानी महेन्द्र प्रताप बया का बुधवार को दोपहर बारह बजे दुखद निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ माह से हृदयरोग का उपचार ले रहे थे तथा बु

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स्वाधीनता सेनानी महेन्द्र प्रताप बया का निधन

स्वाधीनता आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले वयोवृद्ध स्वाधीनता सेनानी महेन्द्र प्रताप बया का बुधवार को दोपहर बारह बजे दुखद निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ माह से हृदयरोग का उपचार ले रहे थे तथा बुधवार दोपहर अचानक हृदयघात से घर पर ही उन्होंने अन्तिम सांस ली।

श्री बया का अन्तिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान से अशोक नगर स्थित मोक्षधाम पर गुरुवार सुबह किया गया। वे अपने पिछे धर्मपत्नी श्रीमती शीला बया सहित भरापूरा परिवार छोड़ गये हैं। श्री बया की पार्थिव देह पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ ही राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त जिला कलक्टर छोगाराम देवासी ने पुष्पचक्र अर्पित किया। उनके सम्मान में पुलिस सशस्त्र जवानों ने फायर कर अन्तिम सलामी दी।

जीवन परिचय – श्री महेन्द्र प्रताप बया का जन्म 17 मई,1929 को उदयपुर में श्री भूरीलाल जी बया के यहां हुआ। उनके पिताश्री स्वतंत्रता संग्राम में रुझान के चलते 20 वर्ष की आयु में मुम्बई चले गये तब श्री महेन्द्र प्रताप बया केवल 5 माह के थे। फिर यरवड़ा जेल में उनके पिता श्री की मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से हुई। गांधीजी ने उन्हें वर्धा बुला लिया। श्री महेन्द्र प्रताप बया भी 10 वर्ष की उम्र तक अपने पिता के साथ गांधीजी के सम्पर्क में रहे और उनकी प्रेरणा से ही 13 वर्ष की उम्र में वे स्वाधीनता संग्र्राम में कूद पड़े।

उन्हें मेवाड़ सरकार ने गिरफ्तार करके सेन्ट्रल जेल भेज दिया जिसे बाद में उन्हें बिना शर्त रिहा करना पड़ा। वे बाद में भी स्वाधीनता संग्राम से जुड़े रहे तथा धन राशि एकत्र कर स्वाधीनता सैनानियों के परिवारों को सहायता मुहैया कराते थे। उन्हें सन् 1942-42 में स्वाधीनता संग्राम में भागीदारी देने से स्कूल में भी सातवीं कक्षा में रोक दिया गया। इसके बाद उनका इन्टर मीडियेट उदयपुर के महाराणा भूपाल कॉलेज से हुआ। बाद में वे इन्जीनियर बने।

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