झील किनारों पर सड़ांध व कचरा हाईकोर्ट के नोटिस के बावजूद भी स्थिति भयावह
पिछोला झील के बारीघाट पर रविवार को नियमित श्रमदान करने पहुंचे झील प्रेमी बदबू से गश खाकर गिरने से बचे। प्रतिमा विशर्जन के दौरान फेंकी सामग्री ए ईद पश्चात विषर्जित मांस के अवशेषों तथा दीपावली पूर्व की जा रही घरो की सफाई के कचरे ने पानी में सड़ कर स्थिति को गंभीर बना दिया है। झील किनारो पर शौच निवृति ने स्थिति को और गम्भीर बना रही है। वहां पर खड़ा रहना भी मुश्किल है।
पिछोला झील के बारीघाट पर रविवार को नियमित श्रमदान करने पहुंचे झील प्रेमी बदबू से गश खाकर गिरने से बचे। प्रतिमा विशर्जन के दौरान फेंकी सामग्री ए ईद पश्चात विषर्जित मांस के अवशेषों तथा दीपावली पूर्व की जा रही घरो की सफाई के कचरे ने पानी में सड़ कर स्थिति को गंभीर बना दिया है। झील किनारो पर शौच निवृति ने स्थिति को और गम्भीर बना रही है। वहां पर खड़ा रहना भी मुश्किल है।
झीलप्रेमी अनिल मेहता, तेज शंकर पालीवाल तथा नन्द किशोर शर्मा ने इसे नागरिको के स्वास्थ्य व झील पर्यावरण के लिए खतरनाक रोगकारी बतलाया है। चांदपोल नागरिक समिति, झील समरक्षण समिति एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में रविवार को आयोजित संवाद में श्रमदानियो ने अफ़सोस जताया कि हाईकोर्ट के नोटिस के दस दिन बीत जाने के बावजूद सम्बंधित सरकारी एजेंसिया व कचरा फ़ेकनेवाले लोग दोनों ही पूर्व की तरह झीलों की स्वच्छता के प्रति लापरवाह है। मदार नहर सहित फतह सागर के पानी में भारी मात्रा में कचरा तैर रहा है।
रविवारीय श्रमदान में रमेश सिंह राजपूत, किशन खटीक, रमेश गमेती, अजय सोनी, मोहनसिंह चुण्डावत, महेंद्र गमेती,कुलदीपक पालीवाल ामलाल गहलोत डालू गमेती,विजय सोनी ,नीलेश पुरोहित एतेज शंकर पालीवाल, अनिल मेहता ,नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया।
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