नारियों के मजबूत कार्य पर समाज का विकास संभव
सामाजिक जीवन का मौलिक आधार नारी ही है क्योंकि नारीयां वहां काम करती है जहां से समाज प्रारम्भ होता है। नारियों का काम नींव मजबूत करने का है समाज उसी नींव पर अपने विकास का महल बनाता है।

सामाजिक जीवन का मौलिक आधार नारी ही है क्योंकि नारीयां वहां काम करती है जहां से समाज प्रारम्भ होता है। नारियों का काम नींव मजबूत करने का है समाज उसी नींव पर अपने विकास का महल बनाता है।
उक्त विचार श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि कुमुद ने श्राविका संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किये। उन्होंने ने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियंा, फिजूल खर्ची और आडम्बर को महिलाएं रोक सकती है। उन्हें अपनी अस्मिता का प्रयोग करना चाहिये। मुनि ने बताया कि अक्सर वक्ताओं द्वारा नारी शक्ति शब्द का उच्चारण किया जाता है किन्तु नारी शक्ति है कहां। यहां नारियां तो अपने स्वत्व को भूली बैठी है। यदि इनका वीरत्व जागृत हो जाए और संगठित होकर कठोर कदम उठाए तो समाज को उत्थान की नई दिशा मिल सकती है।
मुनि ने कहा कि समाज से निश्चित ही कुछ महिलाओं ने उच्चतम अध्ययन प्राप्त कर सरकारी सेवाओं में उच्च पद प्राप्त किया है। कई महिलाएं राजनीति में भी उच्च पदस्थ है किन्तु देखा यह जा रहा है कि महिलाएं अधिकतर समाज से दूरी बना कर ही रहती है। उनका समाज को और नारी समाज को जो लाभ मिलना चाहिये वह नहीं मिल रहा है। वैसे आम नागरिकों में नारी समाज की सामाजिक सक्रियता कम ही है। महिला वर्ग में स्वाध्याय की प्रवृति बढऩी चाहिये। ज्ञान होगा तो महिलाएं हिताहित को समझ सकेगी।
महिलाएं सेवा मूर्ति कहलाती है, किन्तु उनकी सेवाएं सीमित दायरे में ही बंधी हुई है उन्हें सेवा को समाज में व्यापक क्षैत्र तक विस्तृत करना चाहिये। जैनशाला, पुस्तकालय चलाना, गरीब विद्यार्थियों सेवा, हॅस्पीटल में रूग्ण सेवा जैसे अनेक कार्य महिलाएं कर सकती है। इस अवसर पर श्री वद्र्धमान स्थानकवासी जैन श्राविका संघ की अध्यक्ष श्राविका संघ की अध्यक्ष शिवा सिंघवी ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडवोकेट गौतमलाल सिरोया थे। ध्वजारोहण महापौर रजनी डांगी ने किया। अध्यक्षता रोशनलाल जैन ने की। विशिष्ट अतिथि जिला प्रमुख मधु मेहता थी। युवक परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र सेठिया ने सामाजिक अभ्युदय एवं नारी पर विचार व्यक्त किए। संचालन महामंत्री आशा कोठारी ने किया। धन्यवाद नीता छाजेड़ ने ज्ञापित किया।
श्री वद्र्धमान स्थानकवासी जैन श्रावका संघ के महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि समाज में सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं गत 30 सितम्बर से नवपद ओली तप आराधान कर रही है जो 8 अक्टूबर तक जारी रहेगी। इस आराधान में श्रावक-श्राविकाएं विगहों यानि तेल,घी, दूध, दही, शक्कर का त्याग कर सिर्फ रूखा, सूखा भोजन दिन में एक बार एक ही स्थान पर बैठ कर करती है। इस अवसर पर श्रद्धपाल की कथा का भी श्रवण करती है। तपाराधाना करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि श्रीपाल नामक महाराज नवपद ओली तप आराधाना की तो उनके शरीर में व्याप्त कोढ़ समाप्त हो गया और वे सुख-समृद्धि से भूरपर हो गये। कार्यक्रम का संचालन हिम्मत बड़ाला ने किया।
