भगवान के लिए ज्ञानी आत्मा हैं तो भक्त परमात्मा: दुर्गेष शास्त्री
सत्संग करते समय चित मे केवल गोविन्द का ध्यान हो तब ईश्वर की प्राप्ति होती है। जो वास्तविकता मे गोविन्द का भक्त है वो सिर्फ इतना जानता हैं कि मैं गोविन्द का हू और गोविन्द मेरा।

सत्संग करते समय चित मे केवल गोविन्द का ध्यान हो तब ईश्वर की प्राप्ति होती है। जो वास्तविकता मे गोविन्द का भक्त है वो सिर्फ इतना जानता हैं कि मैं गोविन्द का हू और गोविन्द मेरा।
यह प्रवचन व्यास पीठ से भागवत कथा के कथा वाचक पंडित दुर्गेश जी शास्त्री महाराज ने उदयपुर के रेलवे ग्राउंड मे मुख्य आयोजक धीरेन्द्र सिंह सचान, मंजु सचान द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ मे कथा के दूसरे दिन श्रोताओं को कही। अपने प्रवचन मे दुर्गेश शास्त्री ने ज्ञानी और भक्त के बीच भगवान के सबसे समीप कौन हैं इस बहस के वृतान्त को सुनाते हुए बताया कि भगवान के लिए ज्ञानी आत्मा हैं तो भक्त परमात्मा जिसका वो चिन्तन करते है।
दूसरे दिन की कथा का प्रारम्भ सचान परिवार एवं अतिथियों के द्वारा श्रीमद् भागवत की आरती के साथ हुआ। आरती के पश्चात् पं. दंर्गेश शास्त्री ने कथा को अनवरत करते हुए ऋषि द्वारा राजा शुक को सात दिन मे मृत्यू हो जाने के श्राप और राजा परिक्षित द्वारा शुक्र को भागवत कथा सुनाकर मोक्ष प्राप्ति का वर्णन किया। आज की कथा मे महाराज ने धु्रव जी की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जिस प्रकार धु्रव ने 5 साल की आयु मे घर छोडकर प्रभु भक्ति की और प्रभु को पा लिया उसी प्रकार मनुष्यों को भजन और प्रभु भक्ति करनी चाहिए।

सात दिवसीय भागवत कथा के मुख्य आयोजक धीरेन्द्र सिंह सचान ने कहा कि यह मैरे लिए अति सौभाग्य की बात हैं कि उदयपुर मे भागवत कथा कराने का परम सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होने कहा कि धर्म के प्रचार प्रसार और धार्मिक सत्संग का अपना एक अलग ही आध्यात्मिक सुख हैं एक अलग ही आनन्द हैं जो मुझे इस कथा के आयोजन के प्रथम दिन से ही महसुस हो रहा है।
भजनो की प्रस्तुति पर खुब झुमे भक्त
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ मे दुर्गेश शास्त्री द्वारा कथा के वर्णन के साथ ही श्रीकृष्ण के भजन हो श्यामा प्यारी कुज बिहारी, जय -जय हरि राम दूलारी, नंद के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की आदि कई भजनो की प्रस्तुतियां और साथ ही दुर्गेश शास्त्री द्वारा वृन्दावन धाम से आई भजन मण्डली द्वारा भजनो के साथ संगीत की स्वर लहरियों को सुनकर सभी भक्तगण श्रीकृष्ण भक्ति मे लीन होकर झूमने लगे।
भक्तो के साथ ही मंच पर विराजे सचान दंपति भी भजनो पर थिरकने से खुद को रोक नही पाये और मस्ती मे झूमते हुए प्रभु भक्ति का आनन्द लेते हुए किर्तन किया।
