सुरक्षित AI के बिना अधूरा रहेगा डिजिटल भारत, ई-गवर्नेंस सम्मेलन में विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी
Udaipur Times, Rajasthan News: 2 जुलाई 2026। 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित द्वितीय ब्रेकआउट सत्र का विषय 'एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेज' रहा। सत्र की अध्यक्षता प्रो. एन.पी. पाधी, निदेशक, एमएनआईटी जयपुर ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से आवश्यक सेवाओं के लिए एआई पर निर्भर होती जा रही है और भविष्य में एआई के प्रभावी एवं सुरक्षित उपयोग के बिना सामान्य जीवन की कल्पना संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और दक्ष एआई टूल्स के अभाव में डिजिटल जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के विस्तार के बावजूद निकट भविष्य में मानव बुद्धिमत्ता का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। Rajasthan News
वेब 5.0 युग में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता
सत्र के पैनलिस्ट प्रो. वीरेंद्र सिंह, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई ने सुपर स्मार्ट वेब 5.0 के दौर में साइबर सुरक्षा की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने साइबर सुरक्षा उल्लंघन के विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के प्रभावी उपयोग के बिना पारदर्शिता, जवाबदेही तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है। Rajasthan News
विश्वसनीय एआई से ही मजबूत होगा ई-गवर्नेंस
पैनलिस्ट रवि गुप्ता, आईपीएस (सेवानिवृत्त), कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस, हैदराबाद ने कहा कि एआई ने सर्विस डिलीवरी को प्रोएक्टिव बनाया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एआई के बिना ई-गवर्नेंस विश्वसनीय नहीं बन सकता। उन्होंने डेटा गोपनीयता, सुरक्षित पहचान एवं एक्सेस मैनेजमेंट की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुरक्षित डेटा एन्क्रिप्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डेटा, एआई का ईंधन है, इसलिए इसकी सुरक्षा सरकार नियंत्रित डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से सुनिश्चित की जानी चाहिए। Rajasthan News
सुरक्षित एआई इकोसिस्टम विकसित करना समय की मांग
पैनलिस्ट नितिन उमेश, सीआईएसओ, प्रामेरिका, गुरुग्राम ने कहा कि एआई अब स्थायी वास्तविकता बन चुका है और इससे जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए प्रणालियों को निरंतर विकसित करना होगा। उन्होंने एआई के बढ़ते प्रसार से उत्पन्न जोखिमों के व्यवस्थित आकलन तथा सुरक्षित एआई इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, डॉ. रमेश बाबू बट्टुला, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, एमएनआईटी जयपुर ने कहा कि हाल के वर्षों में एआई के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि एआई के व्यापक विस्तार के लिए इसकी सेवाओं का सुरक्षित एवं विश्वसनीय होना आवश्यक है तथा बदलते जोखिमों के अनुरूप सुरक्षा तंत्र को लगातार अद्यतन किया जाना चाहिए। Rajasthan News
प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ समापन
सत्र का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने एआई, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद किया। समापन अवसर पर डीओआईटीसी, राजस्थान के तकनीकी निदेशक अखिलेश मित्तल ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट किए। Rajasthan News
