जमीन खरीदने से पहले इन 7 दस्तावेजों को देखना ना भूलें, नहीं होगा आपके साथ फ्रॉड

 | 
जमीन खरीदने से पहले इन 7 दस्तावेजों को देखना ना भूलें, नहीं होगा आपके साथ फ्रॉड

Udaipur Times, Property Buying Tips : कोई व्यक्ति अपने सपनों का घर खरीदने के लिए जीवन भर की कमाई बचाता है, लेकिन बेईमान बिल्डरों और डेवलपर्स द्वारा प्रॉपर्टी खरीदारों को धोखा देने की कहानियां उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं। हालांकि GST और RERA जैसे नए नियमों और कानूनों के लागू होने से खरीदार सशक्त हुए हैं, फिर भी कई शहरों में प्रॉपर्टी धोखाधड़ी की कहानियाँ ज़्यादातर खरीदारों को डराती हैं। 

विक्रेता कई तरह से खरीदारों को धोखा देते हैं, जैसे नकली दस्तावेज देना, प्रॉपर्टी पर लोन लेना, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी देना, नकली लेआउट दिखाना, डबल रजिस्ट्रेशन, संदिग्ध एग्रीमेंट आदि। इसलिए, भारत में प्रॉपर्टी खरीदते समय और पैसे ट्रांसफर करते समय खरीदारों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। 

सेल डीड (Sale Deed)

भारत के किसी भी शहर में प्रॉपर्टी खरीदते समय सेल डीड सबसे जरूरी दस्तावेज़ है जिसकी जाँच की जानी चाहिए। यह वह कानूनी दस्तावेज है जो विक्रेता के नाम से आपके नाम पर प्रॉपर्टी का मालिकाना हक, टाइटल और अन्य सभी अधिकार ट्रांसफर करने की बात कहता है। कागज़ों पर साइन करने से पहले हमेशा डीड में लिखी हर शर्त की जाँच करनी चाहिए, प्रॉपर्टी के टाइटल को क्रॉस-चेक करना चाहिए और बाकी सभी शर्तों को पढ़ना चाहिए।

अप्रूवल प्लान (Approval Plan)

अप्रूवल प्लान अधिकार क्षेत्र वाले कमिश्नर या उनके द्वारा नियुक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। यह प्लान तब मंज़ूर किया जाता है जब बिल्डर या डेवलपर अधिकारी को निम्नलिखित दस्तावेज जमा करता है:

टाइटल डीड
शहर/पंचायत सर्वे स्केच
लेटेस्ट टैक्स रसीदें
फाउंडेशन सर्टिफिकेट
जमीन के इस्तेमाल का सर्टिफिकेट
प्रॉपर्टी असेसमेंट एक्सट्रैक्ट
प्रॉपर्टी PID नंबर
पहले मंज़ूर किए गए प्लान
प्रॉपर्टी की ड्राइंग

मदर डीड (Mother Deed)

मदर डीड एक और जरूरी कानूनी दस्तावेज़ है जो भविष्य में आपकी प्रॉपर्टी बेचने में आपकी मदद करेगा। यह दस्तावेज़ होने से आपको प्रॉपर्टी के पिछले मालिकों का पता लगाने और अपनी मौजूदा ओनरशिप का मज़बूत सबूत बनाने में मदद मिलेगी। यह जानने में बहुत मददगार हो सकता है कि समय के साथ-साथ प्रॉपर्टी के मालिक कौन-कौन रहे हैं।

पावर ऑफ अटॉर्नी (Power Of Attorney)

किसी प्रॉपर्टी की पावर ऑफ़ अटॉर्नी वह कानूनी डीड है जो किसी व्यक्ति को अपने नाम पर प्रॉपर्टी बेचने, किराए पर देने या गिरवी रखने और उससे आर्थिक लाभ उठाने का अधिकार देती है। यह देखना ज़रूरी है कि आपको सभी कानूनी अधिकार दिलाने के लिए पावर ऑफ़ अटॉर्नी ठीक से रजिस्टर की गई हो।

कनवर्जन सर्टिफिकेट

कनवर्जन सर्टिफ़िकेट भारत सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जारी किया जाता है, ताकि खेती की जमीन को रिहायशी ज़मीन में बदलने की मंज़ूरी मिल सके। इस सर्टिफ़िकेट के बिना, जमीन को खेती की ज़मीन ही माना जा सकता है और वहाँ घर बनाना गैर-कानूनी हो सकता है। इसके अलावा, तहसीलदार द्वारा जारी किया गया नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट (NOC) भी होना चाहिए।

कंप्लीशन सर्टिफिकेट

RERA लागू होने के बाद भारत में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए एक और जरूरी सर्टिफिकेट 'कंप्लीशन सर्टिफ़िकेट' है। इस सर्टिफ़िकेट की जाँच करने से यह पक्का हो जाएगा कि जो घर या बिल्डिंग आप खरीद रहे हैं, वह रेगुलेटरी अथॉरिटी के तय नियमों और मंज़ूर किए गए प्लान के अनुसार पूरी तरह से बनकर तैयार है।

ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट

यह सर्टिफ़िकेट बिल्डिंग का इंस्पेक्शन करने और उसकी हालत को मंज़ूरी देने के बाद जारी किया जाता है। यह सर्टिफ़िकेट इस बात की पुष्टि करता है कि बिल्डिंग रहने के लिए तैयार है और उसमें रहा जा सकता है।

एनकंब्रेंस सर्टिफिकेट

एनकंब्रेंस सर्टिफ़िकेट आपको प्रॉपर्टी के मालिकाना हक में हुए बदलावों की पूरी जानकारी देता है, खासकर तब जब उसे किसी होम लोन के लिए गिरवी रखा गया हो। इससे आप उस प्रॉपर्टी से जुड़े सभी टाइटल ट्रांसफ़र या कानूनी रूप से रजिस्टर्ड लेन-देन देख सकते हैं जिसे आप खरीदने जा रहे हैं।

ये कुछ ऐसे दस्तावेज हैं जिनकी जांच हमेशा करनी चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि प्रॉपर्टी कानूनी है और आपको उस पर कानूनी अधिकार मिल सकता है। इन दस्तावेज़ों की जाँच करने से आपको यह पता चल जाएगा कि आप एक कानूनी लेन-देन कर रहे हैं और किसी तरह के धोखाधड़ी वाले सौदे में नहीं फंस रहे हैं।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News