महावीर के सिद्धान्तों का गुणगणान ही नहीं करें जीवन में भी उतारें: सुप्रकाशमति माताजी

भारत देश में जहां भी जैन लोग हैं वो भगवान महावीर जयंति मनाते हैं। लेकिन अन्तरंग में छिपा एक गम भी है कि भगवान महावीर की शोभायात्रा, श्रीजी की शोभा यात्रा में नगर भ्रमण में प्रभावना के रूप मेें आईसक्रीम, बिस्किट, ठंडाई, दूध आदि बांटे जाते हैं।

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महावीर के सिद्धान्तों का गुणगणान ही नहीं करें जीवन में भी उतारें: सुप्रकाशमति माताजी

भारत देश में जहां भी जैन लोग हैं वो भगवान महावीर जयंति मनाते हैं। लेकिन अन्तरंग में छिपा एक गम भी है कि भगवान महावीर की शोभायात्रा, श्रीजी की शोभा यात्रा में नगर भ्रमण में प्रभावना के रूप मेें आईसक्रीम, बिस्किट, ठंडाई, दूध आदि बांटे जाते हैं।

सभी लोग खाते- पीते चलते हैं। लेकिन जो भी पात्र और उनमें कुछ झूठन बचता है उसे रास्ते में ऐसे ही फैंक देते हैं और आने-जाने वाले उस झूठन को रौंदते हुए चलते हैं। यह एक दर्दनाक विषय है कि जैनी होकर भी हम अपने ही संस्कारों से वंचित होते जा रहे हैं। उक्त विचार परम पूज्या गुरू मां गणिनी श्री 105 सुप्रकाशमति माताजी ने महावीर जयंति के अवसर पर आदिनाथ मन्दिर सेक्टर 11 में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।

महावीर के सिद्धान्तों का गुणगणान ही नहीं करें जीवन में भी उतारें: सुप्रकाशमति माताजी

गुरू मां ने कहा कि इतना ही नहीं हम श्रीजी की यात्रा में नारे लगाते हैं कि अहिंसा परमो धर्म की जय। हमारी अहिंसा कहां से पलती है। भगवान महावीर ने हमें जीवन जीने के लिए कई सूत्र बताये हैं। भगवान महावीर का अवतार ही अहिंसा के लिए हुआ था जब धरती पर हिंसा का ताण्डव होने लगा।

उन्होंने अवतरित होते ही अहिंसा का बिगुल बजाया। उन्होंने अहिंसा पर ही ज्यादा जोर दिया और कहा कि जीयो और जीने दो। लेकिन वर्तमान युग में उल्टी नीति चल रही है। मारो और मरने दो।

गुरू मां ने कहा कि हम सभी भगवान महावीर के शासनकाल में जी रहे हैं, जिनके शासनकाल में जी रहे हैं उनके गुणों का बखान करते हैं। हम तो अपने बच्चों का या परिवार में किसी की भी बर्थ डे मनाते हैं तो मोमबत्ती बुझा देते हैं और केक दूसरे का झूठा खा लेते हैं।

परन्तु महापुरूषों के बर्थ डे मनाते हैं तो दीपक जलाकर मनाना चाहिये जिससे हमारे जीवन में अन्धकार हटकर नई रोशनी हो जाए और हमारा जीवन धर्म का अनुसरण करते हुए आगे की ओर एक दीपक रोशनी की तरह आगे बढ़े।

आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष राजेद्र प्रसाद कोठारी ने बताया कि गुरू मां की परिवार संस्कार यात्रा का से. 11 में प्रवेश हुआ। प्रति दिन 8.30 बजे युवाओं एवं परिवार की सोच को सकारात्मक बनाने, जीवन में सामन्जस्य कैसे हो और जीने की कला के बारे में प्रवचन दिया जाएगा।

महामन्त्री रोशन लाल जैन ने बताया कि समाज के अनुरोध पर गुरू मां पुन: से. 11 में पधारी हैं। महावीर जयंति पर प्रात: गुरू मां सुप्रकाशमति ससंघ के सानिध्य में महावीर सन्देशों की झांकियां, प्रभात फेरी के साथ जुलूस निकाला गया एवं भगवान महावीर का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया।

सायंकाल भगवान महावीर जन्मोत्सव मनाया गया। कैसे महावीर का जन्म होता है और कैसे मां पालना झुलाकर बालक वर्धमान को खुश करती है। इस दौरान आस-पास क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं में भगवान महावीर को झुला झुलाने की होड़ मच गई।

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