हिंदी को अस्मिता का प्रश्न न बनाएं
भाषा अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है, किन्तु आज़ादी के पश्चात हुए परिवर्तनों ने हिंदी भाषा को अस्मिता का प्रश्न बना दिया हैं. भाषा को लेकर उत्पन्न विवाद सभ्यता पर संकट उत्पन्न करते हैं. अतः विचारों में सामंजस्यता लाते हुए सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए, साथ ही अपनी भाषा को भी विकसित करना चाहिए.
भाषा अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है, किन्तु आज़ादी के पश्चात हुए परिवर्तनों ने हिंदी भाषा को अस्मिता का प्रश्न बना दिया हैं. भाषा को लेकर उत्पन्न विवाद सभ्यता पर संकट उत्पन्न करते हैं. अतः विचारों में सामंजस्यता लाते हुए सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए, साथ ही अपनी भाषा को भी विकसित करना चाहिए.
उक्त विचार विद्या भवन रुरल इंस्टीट्यूट उदयपुर के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रो. माधव हाड़ा ने व्यक्त किए. प्रो. हाड़ा ने कहा कि बाजारवाद के इस दौर में आज हिंदी सम्पर्क भाषा बन चुकी है. सम्प्रेषण के लिए एक सामान्य भाषा की सभी को जरूरत है. इसमें हिंदी का अपना विशिष्ट महत्व है. अतः ऐसे कोई प्रयास नहीं होने चाहिए जो भावाभिव्यक्ति को कुंठित कर दे.
इससे पूर्व हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सरस्वती जोशी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए हिंदी सप्ताह के तहत हुई विविध प्रतिस्पर्धाओं का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया. इस अवसर पर विविध प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरुस्कृत भी किया गया.
धन्यवाद ज्ञापन डॉ रक्षा गोदावत ने दिया. डॉ अर्चना जैन, डॉ रतन लाल सुथार, डॉ विकास बया, डॉ परस राम तेली, डॉ समीर व्यास, डॉ कंचन पानेरी, डॉ सबा खान, डॉ मनीष रावल, सुश्री नंदिनी सिंह, श्री लक्ष्मण सिंह, सुश्री लक्ष्मी दुलावत सहित कई संकाय सदस्य और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन डॉ मनोज राजगुरु ने किया.
To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on GoogleNews | Telegram | Signal
