घर खरीदते वक्त एग्रीमेंट और सेल डेड में ना करें ये गलती ! वरना पैसा देने के बाद भी नहीं मिलेगी प्रॉपर्टी
Udaipur Times, Property Documents : घर, फ़्लैट या ज़मीन खरीदना ज़िंदगी का एक बड़ा फैसला होता है। इस प्रक्रिया में कई दस्तावेज़ शामिल होते हैं, लेकिन 'एग्रीमेंट टू सेल' (बिक्री का समझौता) और 'सेल डीड' (बिक्री विलेख) सबसे जरूरी दस्तावेज हैं। लोग अक्सर इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जो एक गलतफ़हमी है और आगे चलकर मुश्किलें पैदा कर सकती है। सिर्फ़ 'एग्रीमेंट टू सेल' पर साइन करने या एडवांस पेमेंट करने से आप प्रॉपर्टी के कानूनी मालिक नहीं बन जाते; मालिकाना हक असल में ट्रांसफर करने के लिए 'सेल डीड' की प्रक्रिया पूरी करना ज़रूरी है।
'एग्रीमेंट टू सेल' क्या है?
'एग्रीमेंट टू सेल' खरीदार और विक्रेता के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट (समझौता) होता है। इस दस्तावेज़ के ज़रिए, विक्रेता खरीदार को प्रॉपर्टी बेचने के लिए सहमत होता है और खरीदार उसे खरीदने के लिए सहमत होता है।
इसमें आम तौर पर प्रॉपर्टी का विवरण, बिक्री की कीमत, दिया गया एडवांस अमाउंट, बाकी पेमेंट का शेड्यूल, रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा और कब्ज़ा सौंपने की तारीख जैसी जानकारी होती है। डील से जुड़ी कोई खास शर्त भी इस समझौते में शामिल की जा सकती है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि 'एग्रीमेंट टू सेल' पर साइन करने से आप अपने-आप प्रॉपर्टी के मालिक नहीं बन जाते।
'सेल डीड' क्या है?
'सेल डीड' वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए प्रॉपर्टी का मालिकाना हक विक्रेता से खरीदार को ट्रांसफर किया जाता है। इसमें खरीदार और विक्रेता का विवरण, प्रॉपर्टी की जानकारी, बिक्री की रकम, पेमेंट की जानकारी, अधिकारों का ट्रांसफर और कब्ज़े का विवरण दर्ज होता है। आम तौर पर, अचल संपत्ति (immovable property) की बिक्री के लिए 'सेल डीड' को कानूनी रूप से तैयार और रजिस्टर करवाना ज़रूरी होता है। इसी प्रक्रिया के ज़रिए प्रॉपर्टी का मालिकाना हक औपचारिक रूप से खरीदार के नाम पर ट्रांसफर किया जाता है।
दोनों के बीच मुख्य अंतर क्या है?
'एग्रीमेंट टू सेल' एक वादा या कॉन्ट्रैक्ट है, जबकि 'सेल डीड' वह दस्तावेज़ है जो असल में मालिकाना हक ट्रांसफर करता है। 'एग्रीमेंट टू सेल' आम तौर पर अंतिम बिक्री से पहले होता है और लेन-देन की शर्तें तय करता है। 'सेल डीड' बिक्री को अंतिम रूप देने और मालिकाना हक ट्रांसफर करने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।
एडवांस पेमेंट करने से आप मालिक नहीं बन जाते
मान लीजिए कि आप किसी घर के लिए ₹10 लाख का एडवांस पेमेंट करते हैं और 'एग्रीमेंट टू सेल' पर साइन करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि घर कानूनी रूप से आपका हो गया है। 'ट्रांसफर ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट' की धारा 54 के अनुसार, प्रॉपर्टी बेचने का सिर्फ़ एक कॉन्ट्रैक्ट होने से ही खरीदार को प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक या टाइटल नहीं मिल जाता है। इसलिए, एडवांस पेमेंट और एग्रीमेंट को मालिकाना हक मिलने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
एग्रीमेंट साइन करने से पहले ये बातें जरूर देख लें
प्रॉपर्टी बेचने के एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले, सिर्फ़ प्रॉपर्टी की कीमत पर ही ध्यान न दें। आपको प्रॉपर्टी के बारे में सही जानकारी, सेलर के मालिकाना हक, प्रॉपर्टी पर कोई मौजूदा लोन या कानूनी अड़चन, पेमेंट का पूरा शेड्यूल, सेल डीड रजिस्टर करने की तारीख और कब्ज़े से जुड़ी शर्तों जैसी जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
इसके अलावा, पहले ही यह साफ़ कर लें कि अगर डील कैंसिल होती है तो एडवांस रकम कैसे वापस मिलेगी, स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च कौन उठाएगा, और क्या प्रॉपर्टी के लिए किसी खास मंज़ूरी की ज़रूरत है।