क्या बारिश और रात को भी बिजली बनाते है सोलर पैनल? PM मोदी ने बताए लक्ष्य, वर्ल्ड बैंक से भी मिला समर्थन

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क्या बारिश और रात को भी बिजली बनाते है सोलर पैनल? PM मोदी ने बताए लक्ष्य, वर्ल्ड बैंक से भी मिला समर्थन 

Success Story of India Solar Panels: भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां साल में करीब 300 दिनों तक भरपूर धूप रहती है। यही वजह है कि देश में सौर ऊर्जा (Solar Energy) का तेजी से विस्तार हो रहा है। हालांकि, लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या बारिश या रात के समय भी सोलर पैनल बिजली बना सकते हैं? इसका जवाब है- सीधे तौर पर नहीं, लेकिन आधुनिक तकनीक की मदद से इन परिस्थितियों में भी सोलर सिस्टम से बिजली का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रात में क्यों नहीं बनाते सोलर पैनल बिजली?

सोलर पैनल सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलते हैं। इसलिए रात में सूरज की रोशनी नहीं होने के कारण पैनल बिजली पैदा नहीं कर पाते। इसी तरह मानसून के दौरान घने बादल और लगातार बारिश की वजह से पैनलों तक कम धूप पहुंचती है, जिससे बिजली उत्पादन भी घट जाता है।

बारिश और रात में कैसे मिलती है बिजली?

बारिश और रात के समय बिजली उपलब्ध कराने के लिए सबसे अधिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। दिन में सोलर पैनल से बनने वाली अतिरिक्त बिजली लिथियम-आयन बैटरियों में स्टोर हो जाती है। यही बिजली रात में या बारिश के दौरान घर, दुकान या कार्यालय को सप्लाई की जाती है।

इसके अलावा हाइब्रिड सोलर सिस्टम भी एक बेहतर विकल्प है। इसमें सोलर पैनल के साथ बिजली के अन्य स्रोत, जैसे विंड एनर्जी, हाइड्रो पावर या बिजली ग्रिड को जोड़ा जाता है। इससे कम धूप या खराब मौसम में भी बिजली की आपूर्ति बनी रहती है। हालांकि इसकी शुरुआती लागत सामान्य सोलर सिस्टम से अधिक होती है।

मानसून में कितना घट जाता है बिजली उत्पादन?

मानसून के दौरान सोलर पैनलों का बिजली उत्पादन कई कारणों से प्रभावित होता है। घने बादलों के कारण सूरज की रोशनी कम मिलती है, जबकि नमी और लगातार बारिश भी पैनलों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में मानसून में बिजली उत्पादन 20 से 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि यह कमी मौसम, क्षेत्र और पैनल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

क्या बारिश से सोलर पैनल खराब हो जाते हैं?

सामान्य बारिश से सोलर पैनलों को नुकसान नहीं होता। उल्टा, बारिश पैनलों पर जमी धूल और गंदगी को साफ कर देती है। लेकिन तेज आंधी, ओलावृष्टि या खराब इंस्टॉलेशन की स्थिति में पैनलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए कंपनियां अब ऐसे पैनल तैयार कर रही हैं, जो नमी और खराब मौसम को बेहतर तरीके से झेल सकें। नियमित सफाई और रखरखाव से भी उनकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है।

भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पावर देश

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, सोलर एनर्जी उत्पादन और कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। देश की स्थापित सोलर क्षमता 150 गीगावाट से अधिक हो गई है, जबकि चीन और अमेरिका पहले और दूसरे स्थान पर हैं।

PM सूर्य घर योजना से मिल रही सब्सिडी

घरों में सोलर रूफटॉप लगाने को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी 2024 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत पात्र परिवारों को रूफटॉप सोलर लगाने पर सब्सिडी दी जाती है। सरकार का लक्ष्य देश के एक करोड़ घरों तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है। इससे लोगों के बिजली बिल में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।

सोलर एनर्जी पर सरकार का फोकस, PM मोदी ने बताए बड़े लक्ष्य

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के लिए मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता, 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सोलर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को तेजी से बढ़ावा दे रही है।

नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम को वर्ल्ड बैंक का समर्थन

देश में सोलर रूफटॉप को बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड बैंक ने भी बड़े वित्तीय सहयोग की घोषणा की है। वर्ल्ड बैंक के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी के मुताबिक, संस्था पिछले एक दशक से भारत के सोलर रूफटॉप सेक्टर को मजबूत करने में सहयोग कर रही है। इस दौरान देश की रूफटॉप सोलर क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो गई है और इसके लिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि जुटाई गई है।

उन्होंने कहा कि नई वित्तीय सहायता से घरों में सोलर एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और सप्लाई चेन व इंस्टॉलेशन सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

820 मिलियन डॉलर का लोन, 4.2 अरब डॉलर की निजी फंडिंग

नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम के तहत इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) से 820 मिलियन डॉलर का ऋण, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड से 60 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण और IBRD के लिवेबल प्लैनेट फंड से 10 मिलियन डॉलर की ग्रांट मिलेगी। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक 4.2 अरब डॉलर की निजी फाइनेंसिंग भी जुटाएगा, जिससे देशभर में सोलर रूफटॉप लगाने की रफ्तार तेज होगी।

बिना गारंटी मिलेगी वित्तीय मदद

प्रोग्राम के टास्क टीम लीडर मोएज चेरिफ ने कहा कि यह कार्यक्रम आर्थिक बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ बिजली वितरण कंपनियों, बैंकों और सोलर वेंडर्स की क्षमता बढ़ाएगा। इसके जरिए लोगों को बिना गारंटी (Collateral-Free) के वित्तीय सहायता मिल सकेगी, जिससे वे अपने घरों में सोलर सिस्टम लगाकर हर महीने बिजली के बिल में बड़ी बचत कर सकेंगे।

17 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य

नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम का उद्देश्य लाखों घरों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग, इंस्टॉलेशन और सर्विस वैल्यू चेन में करीब 17 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। भारत ने 2035 तक अपने बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म (Non-Fossil Fuel) ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा है।

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