क्या आपके पास भी है 1 भैंस ? जाने कितना मिल सकता है आपको लोन, देखें पूरी जानकारी

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क्या आपके पास भी है 1 भैंस ? जाने कितना मिल सकता है आपको लोन, देखें पूरी जानकारी 

Udaipur Times, Buffalo Loan : भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां खेती के साथ पशुपालन भी किसानों की आय का महत्वपूर्ण जरिया है। देश में बड़ी संख्या में किसान गाय और भैंस पालन के जरिए दूध उत्पादन का काम करते हैं। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अलग-अलग योजनाएं चलाई जाती हैं। इसके अलावा कई बैंक भी पशुपालन और डेयरी के लिए लोन उपलब्ध कराते हैं। 

ऐसे में लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि अगर किसी को सिर्फ एक भैंस खरीदने के लिए लोन चाहिए तो उसे कितनी राशि मिल सकती है और इसके लिए आवेदन कैसे किया जाता है।

क्या होगी 1 भैंस पर लोन की राशि?

भैंस खरीदने के लिए मिलने वाले लोन की राशि किसी एक तय रकम पर निर्भर नहीं करती। यह संबंधित बैंक, योजना, भैंस की कीमत, नस्ल, आवेदक की पात्रता और डेयरी यूनिट के आकार जैसी कई बातों पर निर्भर करती है। दी गई जानकारी के अनुसार, एक भैंस के लिए करीब 60 हजार रुपये से 65 हजार रुपये तक का लोन मिल सकता है। हालांकि, यह राशि निश्चित लोन सीमा नहीं है और वास्तविक लोन बैंक की जांच तथा संबंधित योजना के नियमों के आधार पर तय किया जा सकता है।

आमतौर पर बैंक एक भैंस के बजाय दो या तीन दुधारू पशुओं की यूनिट के लिए लोन देने को अधिक व्यवहारिक मान सकते हैं। इसका कारण यह है कि डेयरी व्यवसाय में नियमित दूध उत्पादन और आय के लिए एक से अधिक पशुओं की यूनिट को ज्यादा उपयोगी माना जाता है। हालांकि, पात्रता और बैंक की शर्तें पूरी होने पर एक भैंस खरीदने के लिए भी लोन मिलने की संभावना रहती है।

3 भैंस के लिए कितना लोन मिल सकता है?

अगर कोई किसान या पशुपालक दो या तीन भैंसों के साथ छोटी डेयरी यूनिट शुरू करना चाहता है तो उसके लिए लोन की राशि एक पशु की तुलना में अधिक हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 3 भैंसों के लिए करीब 1.5 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक राशि भैंस की नस्ल, खरीद कीमत, दूध उत्पादन क्षमता, डेयरी यूनिट की लागत और बैंक की लोन पॉलिसी के अनुसार अलग हो सकती है।

पशुपालन के लिए कौन-कौन सी योजनाएं हैं?

किसानों और पशुपालकों के लिए पशुपालन तथा डेयरी से जुड़ी अलग-अलग वित्तीय योजनाएं उपलब्ध हैं। इनमें पशु किसान क्रेडिट कार्ड यानी Pashu KCC भी शामिल है, जिसके जरिए पशुओं के चारे, रख-रखाव और अन्य कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्रेडिट सुविधा मिल सकती है। 

इसके अलावा बड़े स्तर पर पशुपालन, डेयरी प्रोसेसिंग और पशु आहार से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन और AHIDF जैसी योजनाओं के तहत भी सहायता का प्रावधान है। हालांकि, हर योजना का उद्देश्य और पात्रता अलग होती है, इसलिए सिर्फ एक भैंस खरीदने के लिए कौन-सी योजना लागू होगी, इसकी जानकारी संबंधित बैंक से लेना जरूरी है।

पशुपालन लोन के लिए कौन पात्र है?

पशुपालन या डेयरी लोन की पात्रता संबंधित योजना और बैंक के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर किसान, पशुपालक, किसान उत्पादक संगठन यानी FPO और कुछ योजनाओं में स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़े लोग आवेदन कर सकते हैं। आवेदक के पास पशुओं को रखने के लिए उचित जगह या शेड होना भी जरूरी हो सकता है। इसके साथ ही बैंक आवेदक की पहचान, बैंकिंग रिकॉर्ड, पशुपालन से जुड़ी योजना और लोन चुकाने की क्षमता जैसी बातों की भी जांच कर सकता है। 

कुछ योजनाओं में आवेदक की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होने की शर्त बताई जाती है, लेकिन यह उम्र सीमा सभी पशुपालन लोन योजनाओं पर समान रूप से लागू हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित योजना और बैंक की मौजूदा पात्रता शर्तों की जांच करना जरूरी है।

पशुपालन लोन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

पशुपालन लोन के लिए आवेदन करते समय बैंक की ओर से पहचान और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाते की जानकारी और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा पशुओं को रखने की जगह या जमीन से जुड़े दस्तावेज और डेयरी या पशुपालन से संबंधित जानकारी भी मांगी जा सकती है। दस्तावेजों की अंतिम सूची बैंक और संबंधित योजना के अनुसार अलग हो सकती है।

पशुपालन लोन के लिए आवेदन कैसे करें?

पशुपालन लोन लेने के लिए सबसे पहले किसान या पशुपालक को अपने नजदीकी बैंक में जाकर उपलब्ध डेयरी या पशुपालन लोन की जानकारी लेनी चाहिए। बैंक से योजना, ब्याज दर, लोन की अवधि, जरूरी दस्तावेज और पात्रता के बारे में जानकारी लेने के बाद आवेदन फॉर्म भरना होता है। कुछ योजनाओं में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है। 

आवेदन के साथ जरूरी KYC दस्तावेज और पशुपालन या डेयरी से संबंधित जानकारी जमा करनी होती है। इसके बाद बैंक आवेदन और दस्तावेजों की जांच करता है। सभी शर्तें पूरी होने पर बैंक की मंजूरी के बाद लोन राशि जारी की जा सकती है।

प्रधानमंत्री पशुपालन लोन कैसे लें?

पशुपालन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की अलग-अलग योजनाएं संचालित होती हैं। ऐसे में ‘प्रधानमंत्री पशुपालन लोन योजना’ नाम से किसी एक योजना को मानकर आवेदन करने के बजाय पहले संबंधित योजना का आधिकारिक नाम और उसकी पात्रता की जानकारी जांचना जरूरी है। किसान अपने नजदीकी बैंक या संबंधित सरकारी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध पशुपालन और डेयरी लोन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बैंक से यह भी पता करना चाहिए कि एक भैंस या छोटी डेयरी यूनिट के लिए कौन-सा लोन उपलब्ध है और उसकी ब्याज दर एवं अन्य शर्तें क्या हैं।

आखिर सरकार पशुपालन के लिए लोन क्यों देती है?

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे किसानों को खेती के अलावा आय का अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है। सरकार की पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य डेयरी और पशुधन गतिविधियों को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और किसानों की आय के अतिरिक्त साधन विकसित करना है। इसी वजह से पशुपालकों को अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से क्रेडिट और अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है।

लोन लेने से पहले किन बातों का रखा जाए ध्यान

अगर आप एक या दो भैंस खरीदने के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो आवेदन करने से पहले बैंक से लोन की अधिकतम राशि, ब्याज दर, लोन अवधि, EMI, गारंटी या जमानत की जरूरत, पशु बीमा और सब्सिडी से जुड़ी शर्तों की जानकारी जरूर लें। साथ ही यह भी पता करें कि जिस योजना के तहत आप आवेदन कर रहे हैं, उसमें भैंस खरीदने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है या नहीं। 

कुल मिलाकर, एक भैंस खरीदने के लिए भी लोन मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन 60-65 हजार रुपये की राशि को सभी बैंकों या योजनाओं की निश्चित लोन सीमा नहीं माना जा सकता। वास्तविक लोन राशि बैंक, संबंधित योजना, भैंस की कीमत, आवेदक की पात्रता और डेयरी यूनिट के आधार पर तय होगी। वहीं, दो या तीन भैंसों की यूनिट के लिए लोन की जरूरत और राशि अधिक हो सकती है। आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक या सरकारी योजना के आधिकारिक नियमों की जांच करना सबसे जरूरी है।

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