पेयजल कि गुणवत्ता पर डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल का साझा संवाद

“उदयपुर की जग प्रसिद्ध झीलें बदरंग नज़र आ रही है। शहर के पेयजल का प्रमुख स्त्रोत होते हुए भी पानी का रंग और गुणवत्ता नज़र नहीं आती। नीले पानी से कभी भरी रहनेवाली ये झीले काले व हरे रंग के पानी से लबरेज हैं। एन एल सी पी की योजना के बावजूद उदयपुर का प्रशासन नगर निगम प्रन्यास पानी की गुणवत्ता लौटाने में नाकामयाब रहे हैं। झीलों की इस स्थिति का प्रमुख कारण प्रशासन की अदूरदर्शिता ही है।“ - उक्त विचार चाँद पोल नागरिक झील संरक्षण समिति व डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल के सांझे संवाद में उभर कर आई।

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“उदयपुर की जग प्रसिद्ध झीलें बदरंग नज़र आ रही है। शहर के पेयजल का प्रमुख स्त्रोत होते हुए भी पानी का रंग और गुणवत्ता नज़र नहीं आती। नीले पानी से कभी भरी रहनेवाली ये झीले काले व हरे रंग के पानी से लबरेज हैं। एन एल सी पी की योजना के बावजूद उदयपुर का प्रशासन नगर निगम प्रन्यास पानी की गुणवत्ता लौटाने में नाकामयाब रहे हैं। झीलों की इस स्थिति का प्रमुख कारण प्रशासन की अदूरदर्शिता ही है।“ – उक्त विचार चाँद पोल नागरिक झील संरक्षण समिति व डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल के सांझे संवाद में उभर कर आई।

झील संरक्षण समिति के डॉ तेज राजदान ने कहा कि झीलों में जाने वाले सिवेरेज की जब तक रोक थाम नहीं होगी तब तक पानी की गुणवत्ता और जलकुम्भी की समस्या बनी रहेगी। झीलों में कई स्थानों से निर्बाध जाने वाले मानव मल से नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव होते हैं।

झील संरक्षण समिति के अनिल मेहता ने कहा कि एंव एल सी पी के तहत सर्व प्रथम झीलों को सिवेरेज से मुक्त करना था लेकिन इस पर कभी गंभीर प्रयास नहीं हुए व इसी वजह से झीलों का पानी व भीतरी शहर का भू-जल प्रदूषित है।

चाँद पोल नागरिक समिति के तेज शंकर पालीवाल ने बताया कि झीलों का पानी सीवर के द्वारा बाहर जा रहा है, वहीँ अम्बापोल सीवर पंप से पानी सीधा सीवर टेंक में जाने से पंप चलने के टेंक भरा रहता है जिससे ये पुख्ता होता है कि झील का पानी सीवर में जा रहा है। टेंक भरे रहने से सीवर लाइन चोक हो रही है परिणाम स्वरुप सीवर लाइन से सीधा सीवर झीलों में समाहित हो रहा है। सीवरेज लाइन के मेन होलो में झीलों का पानी भारी मात्रा में गिर रहा है लेकिन नगर निगम अब तक उन सभी होलो को चिन्हित भी नहीं कर पाई है। झीलों के भरे रहने के दौरान ही अगर पता कर लिया जाये तो प्रेशर ग्राउटिंग से इस पानी को रोका जा सकता है।

झील हितेषी नागरिक मंच के हाजी सरदार मोहम्मद ने कहा कि नागा मगरी की तरफ पिछोला में बारिश के दौरान इकट्ठी हुई जल कुम्भी का अम्बार लगा हुआ है। दूसरी तरफ जैसे ही जलदाय विभाग द्वारा नल चालू होते है उस दौरान नालियों का पानी सीधा झील में समाहित होता है जिसे रोकने की जरुरत है। हाजी ने नागरिको से भी अपील की कि वे झीलों में कचरा, बोतले, बिस्तर एंव पूजा सामग्री आदि न फेकें।

ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने कहा कि झीलों के प्राकृतिक सौदर्य को बरक़रार रखने और इन्हें हमेशा के लिए बेहतर बनाने के लिए पहाडियों पर हरीतिमा लाने एंव केचमेंट की देखभाल और झीलों के जल मार्ग को अतिक्रमण और व्यवसायिक गतिविधियों से मुक्त रखना होगा।

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